अपोलो स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मदुराई ने एबीओ-इनकॉम्पैटिबल लिविंग-डोनर किडनी ट्रांसप्लांट किया। एंटीजन-विशिष्ट इम्यूनोएडसॉर्प्शन थैरेपी से एंटीबॉडी टाइटर को घटाकर सफल ऑपरेशन हुआ।
- एबीओ-इनकॉम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट मदुराई में सफल
- एंटीजन-विशिष्ट इम्यूनोएडसॉर्प्शन ने एंटीबॉडी टाइटर घटाया
- 40 वर्षीय रोगी को उसकी पत्नी से किडनी मिली
अपोलो स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मदुराई ने एबीओ-इनकॉम्पैटिबल (ABO‑incompatible) लिविंग‑डोनर किडनी ट्रांसप्लांट किया, जिसमें 40‑वर्षीय ओ‑पॉजिटिव रोगी को उसकी ए‑पॉजिटिव पत्नी से किडनी मिली। यह प्रक्रिया उन्नत एंटीजन‑विशिष्ट इम्यूनोएडसॉर्प्शन थैरेपी के माध्यम से संभव हुई।
प्रक्रिया के विवरण
कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट पी. अरुण प्रसाद ने बताया कि एबीओ‑इनकॉम्पैटिबल ट्रांसप्लांट में रोगी के रक्त में उच्च एंटीबॉडी टाइटर के कारण विशेष इम्यूनोलॉजिकल तैयारी आवश्यक होती है। रोगी के ए‑एंटीबॉडी टाइटर को 1:256 से घटाकर 1:8 किया गया, जिससे किडनी को असफल इंफ्यूजन से बचाया गया।
चिकित्सीय महत्व
परम्परागत प्लाज़्मा एक्सचेंज में कठिनाइयाँ आती थीं, लेकिन एंटीजन‑विशिष्ट इम्यूनोएडसॉर्प्शन ने ए‑एंटीबॉडी को चयनात्मक रूप से हटाया और उपचारित प्लाज़्मा को रोगी को वापस दिया। इस तकनीक ने न केवल एंटीबॉडी को घटाया, बल्कि रोगी के समग्र क्लिनिकल स्थिति की निगरानी को भी आसान बनाया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such personalised desensitisation strategies can dramatically expand the donor pool in regions with high ABO‑incompatibility rates, offering hope to thousands of patients awaiting transplants in India.
"इम्यूनोएडसॉर्प्शन ने एंटीबॉडी को लक्ष्यित रूप से हटाकर ट्रांसप्लांट की सफलता दर को बढ़ाया है," कहा विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
Q1: एबीओ‑इनकॉम्पैटिबल ट्रांसप्लांट क्या है?
A: यह वह प्रक्रिया है जिसमें रक्त‑समूह में असमानता होने के बावजूद डोनर की किडनी को रिसीवर को दिया जाता है, जिसके लिए एंटीबॉडी को घटाने की विशेष तकनीकें आवश्यक होती हैं।
Q2: इम्यूनोएडसॉर्प्शन कैसे काम करता है?
A: यह एक फिल्टर‑आधारित प्रक्रिया है जो रोगी के प्लाज़्मा से विशिष्ट एंटीबॉडी को हटाती है और शुद्ध प्लाज़्मा को वापस शरीर में प्रवाहित करती है।