एक संसदीय समिति ने भारत के 40 करोड़ लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की गंभीर समस्या को उजागर किया है, जो न तो सरकारी सब्सिडी के पात्र हैं और न ही निजी उपचार का खर्च उठा सकते हैं। यह 'मिडल क्लास' संकट दवाओं और परीक्षणों के माध्यम से परिवारों की आय को धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।

  • भारत की 25% से अधिक आबादी (40 करोड़ लोग) स्वास्थ्य देखभाल के 'गैप' में फंसी है।
  • निजी क्षेत्र 60% इनपेशेंट और 70% आउटपेशेंट देखभाल प्रदान करता है, जो अत्यधिक महंगा है।
  • सरकारी स्वास्थ्य खर्च जीडीपी का केवल 1.43% है, जो 2.5% के लक्ष्य से बहुत कम है।

भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक गहरा संरचनात्मक संकट उभर कर सामने आया है। संसदीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 40 करोड़ लोग—यानी कुल जनसंख्या का एक चौथाई से अधिक—एक ऐसे जाल में फंसे हैं जिसे 'मिडल क्लास हेल्थकेयर गैप' कहा जा रहा है। ये लोग इतने संपन्न नहीं हैं कि वे निजी अस्पतालों के बढ़ते खर्चों को आसानी से झेल सकें, और न ही वे इतने गरीब हैं कि सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा सकें।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस वर्ग के लिए खतरा केवल एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी नहीं है, बल्कि दवाओं, परामर्श और डायग्नोस्टिक टेस्टों के माध्यम से होने वाला निरंतर आर्थिक क्षरण है। विशेष रूप से मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (Hypertension) जैसी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के लिए, यह खर्च जीवनभर का बोझ बन जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण तेजी से बढ़ा है, लेकिन सुरक्षा तंत्र अभी भी पुराना है। जहाँ आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं गरीबों की मदद कर रही हैं, वहीं मध्यम वर्ग बिना किसी ठोस वित्तीय सुरक्षा के निजी क्षेत्र की मनमानी कीमतों के सामने असुरक्षित खड़ा है।

भारत में स्वास्थ्य देखभाल का संकट केवल अस्पतालों की कमी नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति और चिकित्सा लागत के बीच का बढ़ता अंतर है।

समिति ने इस संकट का मुख्य कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कम खर्च को माना है। वर्तमान में, भारत का स्वास्थ्य खर्च जीडीपी का मात्र 1.43% है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत यह लक्ष्य 2.5% निर्धारित किया गया है। सरकारी खर्च में गिरावट का सीधा असर नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है।

सेवा का प्रकारसरकारी सुविधा (औसत खर्च)निजी सुविधा (औसत खर्च)
प्रसव (Childbirth)₹2,299₹37,630
देखभाल का स्तरसब्सिडी प्राप्तउच्च लागत वाला

रिपोर्ट में दवाओं के बढ़ते खर्च पर भी चिंता जताई गई है, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 30% है। इसके अलावा, एंटीबायोटिक दवाओं की बिना पर्ची के बिक्री और रिटेल फार्मेसी में अत्यधिक मार्जिन को भी एक बड़ी समस्या बताया गया है।

Did You Know?: भारत में निजी क्षेत्र 70% तक आउटपेशेंट (OPD) सेवाएं प्रदान करता है, जो मध्यम वर्ग की जेब पर सबसे अधिक बोझ डालता है।

Frequently Asked Questions

1. 'मिडल क्लास हेल्थकेयर गैप' क्या है?
यह उन लोगों की स्थिति है जो सरकारी सहायता के लिए बहुत समृद्ध हैं लेकिन निजी चिकित्सा खर्चों के लिए पर्याप्त सुरक्षित नहीं हैं।

2. सरकार स्वास्थ्य पर कितना खर्च कर रही है?
वर्तमान में सरकार स्वास्थ्य पर जीडीपी का केवल 1.43% खर्च कर रही है, जो कि लक्ष्य से काफी कम है।