प्रसिद्ध कार्डियक सर्जन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने भारतीयों को कोलेस्ट्रॉल के स्तर की नियमित जांच करने की सलाह दी है। उन्होंने हृदय स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती लापरवाही और युवाओं में बढ़ते जोखिमों पर चिंता व्यक्त की है।
- 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीयों को नियमित कोलेस्ट्रॉल जांच करानी चाहिए।
- भारत में हृदय रोगों का पैटर्न वैश्विक स्तर से भिन्न और अधिक जटिल है।
- युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं और पैल्पिटेशन (धड़कन बढ़ना) के मामले बढ़ रहे हैं।
भारत के सुप्रसिद्ध कार्डियक सर्जन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने देश के स्वास्थ्य परिदृश्य को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय को नियमित रूप से अपने कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करानी चाहिए। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब भारत में हृदय रोगों का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है।
डॉ. शेट्टी का मानना है कि कोलेस्ट्रॉल का स्तर अक्सर चुपचाप बढ़ता है, जिससे व्यक्ति को तब तक कोई लक्षण महसूस नहीं होता जब तक कि स्थिति गंभीर न हो जाए। हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है; जीवनशैली में बदलाव और खान-पान की आदतों के कारण युवा आबादी भी इसके निशाने पर है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में हृदय रोग का जोखिम अन्य देशों की तुलना में अधिक है। आनुवंशिक कारकों और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण, भारतीयों में 'एथेरोस्क्लेरोसिस' (धमनियों का सख्त होना) का खतरा अधिक होता है। डॉ. शेट्टी की यह सलाह निवारक स्वास्थ्य देखभाल (preventive healthcare) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच केवल एक चिकित्सा परीक्षण नहीं है, बल्कि यह जीवन बचाने वाला एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है।
हालिया शोध और विशेषज्ञों की राय यह भी बताती है कि युवाओं में हृदय की धड़कन का तेज होना (palpitations) एक उभरती हुई समस्या है। यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह भविष्य में गंभीर हृदय विफलता का कारण बन सकता है। हृदय स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण को केवल बीमारी के इलाज से बदलकर 'रोकथाम' पर केंद्रित करने की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में, भारत में हृदय रोगों के मामलों में भारी उछाल देखा गया है। पहले जहाँ हृदय रोग को 'बुढ़ापे की बीमारी' माना जाता था, वहीं अब 25-30 वर्ष की आयु के लोग भी गंभीर हृदय समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. कोलेस्ट्रॉल की जांच कितनी बार करानी चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार, स्वस्थ वयस्कों को कम से कम साल में एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए।
2. क्या कोलेस्ट्रॉल केवल खान-पान से बढ़ता है?
नहीं, आनुवंशिकता (genetics) और शारीरिक सक्रियता की कमी भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करती है।