बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी ने कुत्तों की सूंघने की अद्भुत क्षमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके कैंसर की शुरुआती पहचान करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस तकनीक ने सात प्रकार के कैंसर की पहचान में 90% से अधिक सटीकता दिखाई है।
- बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी कुत्तों की सूंघने की शक्ति और AI का उपयोग कर रही है।
- फेज-2 ट्रायल में सात प्रकार के कैंसर की पहचान में 90% से अधिक सफलता मिली।
- यह तकनीक मरीज के सांस या पसीने से निकलने वाले विशिष्ट गंध पैटर्न को पहचानती है।
- यह शोध 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।
कैंसर के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण कारक उसका शुरुआती चरण में पता चलना है। हाल ही में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शोध सामने आया है, जहाँ प्रशिक्षित कुत्तों की सूंघने की क्षमता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़कर कैंसर का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप कंपनी इस दिशा में अभूतपूर्व कार्य कर रही है।
इस शोध का आधार यह वैज्ञानिक तथ्य है कि कैंसर जैसी बीमारियां शरीर के मेटाबॉलिज्म में बदलाव लाती हैं, जिससे सांस, पसीने या शरीर से निकलने वाले वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) का गंध पैटर्न बदल जाता है। जहाँ मानव नाक इन सूक्ष्म बदलावों को नहीं पहचान सकती, वहीं कुत्तों की नाक इन संकेतों को पकड़ने में सक्षम है।
तकनीकी प्रक्रिया और प्रशिक्षण
बेंगलुरु की यह टीम लगभग 15 प्रशिक्षित कुत्तों, जिनमें मुख्य रूप से लैब्राडोर शामिल हैं, के साथ काम कर रही है। प्रक्रिया बेहद वैज्ञानिक है: मरीज को एक कॉटन मास्क के माध्यम से सांस लेने के लिए कहा जाता है, जिसे बाद में लैब में भेजा जाता है। कुत्ते इस सैंपल को सूंघते हैं और अपनी प्रतिक्रिया देते हैं—जैसे किसी विशेष फीडर की ओर दौड़ना या सैंपल को छूना। इन व्यवहारों को उन्नत सेंसर और AI सिस्टम द्वारा डेटा में बदल दिया जाता है।
कुत्तों की सूंघने की जैविक क्षमता और AI की डेटा प्रोसेसिंग शक्ति का संगम कैंसर निदान के भविष्य को बदल सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह कैंसर स्क्रीनिंग की लागत को नाटकीय रूप से कम कर सकती है। वर्तमान में बायोप्सी और महंगे स्कैनिंग उपकरणों पर निर्भरता अधिक है, जबकि यह गैर-आक्रामक (non-invasive) तरीका शुरुआती पहचान के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
रिसर्च के परिणाम
कर्नाटक के छह अस्पतालों में 1,500 से अधिक लोगों पर किए गए परीक्षणों में इस तकनीक ने सात प्रकार के कैंसर की पहचान करने में 90% से अधिक की सफलता दर दिखाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसे अभी अंतिम निदान नहीं माना जा सकता, लेकिन यह एक अत्यंत आशाजनक पूरक उपकरण (supplementary tool) है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह तकनीक कैंसर का पक्का इलाज है?
उत्तर: नहीं, यह केवल कैंसर की शुरुआती पहचान करने का एक सहायक टूल है, जो इलाज की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।
प्रश्न 2: क्या मरीज को कुत्ते के पास जाना होगा?
उत्तर: नहीं, मरीज केवल मास्क में सांस लेता है और सैंपल लैब में कुत्तों को भेजा जाता है, जिससे सीधा संपर्क आवश्यक नहीं है।