सपियंस हेल्थ फाउंडेशन ने तमिलनाडु सरकार द्वारा विधानसभा में घोषित नमक कटौती अभियान का समर्थन किया है, जिसका उद्देश्य उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के बोझ को कम करना है।
- तमिलनाडु सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए राज्यव्यापी नमक कटौती अभियान शुरू किया है।
- सपियंस हेल्थ फाउंडेशन ने नमक के अधिक सेवन को स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी की बीमारी से जोड़ा है।
- यूके के 2005 के सफल अभियान को प्रोसेस्ड फूड में सोडियम कम करने के लिए एक मॉडल माना गया है।
सपियंस हेल्थ फाउंडेशन ने मंगलवार को विधानसभा में तमिलनाडु सरकार द्वारा नमक कटौती अभियान की घोषणा का औपचारिक रूप से स्वागत किया है। इस रणनीतिक कदम को राज्य भर में गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
फाउंडेशन के अनुसार, नमक के सेवन में निरंतर कमी लाने से उच्च रक्तचाप (hypertension), स्ट्रोक, दिल के दौरे और किडनी की बीमारियों के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जनसंख्या के नमक सेवन को कम करके, राज्य न केवल जीवन प्रत्याशा में सुधार कर सकता है, बल्कि दीर्घकालिक हृदय देखभाल से जुड़ी स्वास्थ्य लागतों को भी कम कर सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जब सरकारी नीति और जमीनी स्तर की वकालत एक साथ मिलती है, तो यह एक शक्तिशाली बदलाव लाता है। जब राज्य सरकार किसी स्वास्थ्य अभियान को अपनाती है, तो यह केवल 'जागरूकता' से आगे बढ़कर 'प्रणालीगत परिवर्तन' बन जाता है, जो खाद्य विनिर्माण मानकों और सार्वजनिक खरीद नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
फाउंडेशन ने अंतरराष्ट्रीय सफलता की कहानियों का हवाला दिया, विशेष रूप से 2005 में 'वर्ल्ड एक्शन ऑन साल्ट, शुगर एंड हेल्थ' (WASSH) के ग्राहम मैकग्रेगर द्वारा शुरू किए गए यूके के नमक-कटौती अभियान का। इस पहल के परिणामस्वरूप ब्रेड में नमक की मात्रा में 30% की कमी आई, जिससे यह सिद्ध हुआ कि उद्योग-व्यापी सहयोग से ठोस स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
"सोडियम के सेवन को कम करना वैश्विक स्तर पर हृदय संबंधी मृत्यु को रोकने के सबसे लागत प्रभावी तरीकों में से एक है।"
सपियंस हेल्थ फाउंडेशन इस लड़ाई में लंबे समय से सक्रिय है। उनका अभियान 2010 में मरीना बीच पर एक वॉकाथॉन के साथ शुरू हुआ, जिसके बाद तिरुचि और पुडुचेरी में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2014 में, फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष राजन रविचंद्रन को वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग द्वारा 'नोटेबल अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया था।
सार्वजनिक रैलियों के अलावा, फाउंडेशन ने 300 से अधिक खाद्य निर्माताओं को पत्र लिखकर नमक की मात्रा कम करने का आग्रह किया है। उन्होंने नेस्ले और हिंदुस्तान लीवर जैसे दिग्गजों के सकारात्मक जवाबों का उल्लेख किया, जिन्होंने अपने नूडल्स उत्पादों में नमक कम किया है। इसके अलावा, फाउंडेशन ने 2017 में IIT-मद्रास और IIT-बॉम्बे के साथ मिलकर नमक और स्वास्थ्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया।
चिकित्सा समुदाय को साथ लाने के लिए, फाउंडेशन ने चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और विजयवाड़ा सहित प्रमुख शहरों में 500 से अधिक चिकित्सकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की हैं। वे अब 'फ्रंट-ऑफ-पैक' फूड लेबलिंग पर जोर दे रहे हैं, ताकि उपभोक्ता खरीदारी के समय सही निर्णय ले सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नमक कम करने से किडनी को कैसे मदद मिलती है?
सोडियम का उच्च स्तर किडनी को रक्त फिल्टर करने के लिए अधिक मेहनत करने पर मजबूर करता है, जिससे समय के साथ किडनी फेलियर या क्रोनिक किडनी रोग हो सकता है।
प्रश्न 2: 'फ्रंट-ऑफ-पैक' लेबलिंग क्या है?
यह खाद्य पैकेजिंग के सामने एक सरल पोषण लेबल है जो उपभोक्ताओं को नमक, चीनी या संतृप्त वसा के उच्च स्तर के बारे में स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है।