खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) का एक खतरनाक स्ट्रेन, SAT-1, 60 वर्षों के बाद यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में फिर से देखा गया है। विशेषज्ञों ने पशु व्यापार के माध्यम से इसके तेजी से प्रसार और विशेष टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है।

  • SAT-1 FMD स्ट्रेन 60 साल बाद यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में फिर से पाया गया।
  • यह वायरस खुर वाले जानवरों को प्रभावित करता है, जिससे छाले, लंगड़ापन और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है।
  • इसका प्रसार केवल जानवरों के संपर्क से नहीं, बल्कि दूषित वाहनों और उपकरणों से भी होता है।
  • सामान्य FMD टीके प्रभावी नहीं हो सकते यदि वे SAT-1 स्ट्रेन के लिए विशिष्ट नहीं हैं।

वैश्विक पशु चिकित्सा समुदाय इस समय हाई अलर्ट पर है क्योंकि खुरपका-मुँहपका रोग (FMD) का SAT-1 सेरोटाइप नाटकीय रूप से वापस आ गया है। 1948 में पहली बार पहचाना गया यह स्ट्रेन ऐतिहासिक रूप से दक्षिणी अफ्रीका तक सीमित था, लेकिन अब यह उन क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है जहाँ इसे 1960 और 70 के दशक के बाद नहीं देखा गया था।

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) के अनुसार, इस पुनरुत्थान की शुरुआत 2025 में इराक, कुवैत, मिस्र और अज़रबैजान में हुई। 2026 तक, इज़राइल, साइप्रस, फिलिस्तीन, चीन और मंगोलिया में पहली बार इसके मामले सामने आए, जबकि तुर्की, लेबनान और ग्रीस में यह लगभग 60 साल बाद लौटा है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि SAT-1 का उभरना केवल एक स्थानीय स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक प्रणालीगत खतरा है। चूंकि FMD की प्रतिरक्षा 'सेरोटाइप-विशिष्ट' होती है, इसलिए सामान्य स्ट्रेन के खिलाफ टीकाकृत पशु भी SAT-1 के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। यह एक ऐसा "इम्युनिटी गैप" पैदा करता है जिससे पशुधन की भारी हानि हो सकती है।

यह वायरस अत्यधिक संक्रामक है। यह न केवल सीधे संपर्क से, बल्कि दूषित जूतों, वाहनों और पशु उत्पादों के माध्यम से भी फैलता है। कर्मा फाउंडेशन के मुख्य पशु चिकित्सक डॉ. सागर पाटांगे के अनुसार, पशुओं का आवागमन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार इस भौगोलिक विस्तार के मुख्य कारण हैं।

"एक बार जब वायरस संवेदनशील पशु आबादी में प्रवेश कर जाता है, तो यह तेजी से फैल सकता है, खासकर वहां जहां जानवरों को पास-पास रखा जाता है।"

पशुपालकों के लिए इसके लक्षण विनाशकारी हैं। संक्रमित मवेशियों और भैंसों में तेज बुखार, अत्यधिक लार टपकना और जीभ व पैरों पर तरल से भरे छाले दिखाई देते हैं। इसके कारण पशु लंगड़ा हो जाता है और दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट आती है। वयस्क जानवर अक्सर ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे पशु मायोकार्डिटिस (हृदय की मांसपेशियों की सूजन) के कारण मर सकते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

FMD सदियों से एक समस्या रहा है, लेकिन SAT (दक्षिण अफ्रीकी क्षेत्र) समूह के सेरोटाइप दशकों तक मुख्य रूप से अफ्रीका में ही सीमित रहे। 20वीं सदी के मध्य में यूरोप और मध्य पूर्व में हुए पिछले हमलों को सख्त क्वारंटाइन और शुरुआती टीकाकरण के माध्यम से नियंत्रित किया गया था। वर्तमान प्रकोप वैश्विक व्यापार में वृद्धि और बदलते पर्यावरणीय कारकों की ओर इशारा करता है।

विशेषतासामान्य FMD स्ट्रेनSAT-1 सेरोटाइप
प्राथमिक क्षेत्रवैश्विक / विभिन्नऐतिहासिक रूप से दक्षिणी अफ्रीका
प्रतिरक्षासामान्य FMD टीकेSAT-1 विशिष्ट टीके की आवश्यकता
संक्रमण स्तरबहुत अधिकअत्यधिक उच्च / तीव्र प्रसार
क्या आप जानते हैं?: खुरपका-मुँहपका रोग इंसानों को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन यह संक्रमित देशों पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों के कारण पूरे कृषि समुदाय को दिवालिया कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या मेरा वर्तमान FMD टीका SAT-1 से बचा सकता है?
जरूरी नहीं। प्रतिरक्षा सेरोटाइप-विशिष्ट होती है; आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका टीका विशेष रूप से SAT-1 स्ट्रेन के लिए हो।

प्रश्न 2: मैं अपने फार्म में वायरस को आने से कैसे रोक सकता हूँ?
सख्त बायो-सिक्योरिटी अपनाएं: सभी वाहनों और जूतों को कीटाणुरहित करें, और नए जानवरों को लाने के बाद कुछ समय के लिए अलग रखें।