600 से अधिक खाद्य निर्माताओं के समूह AIFPA ने सुप्रीम कोर्ट से पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल के नियमों की दोबारा वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और कॉर्पोरेट हितों के बीच टकराव बढ़ गया है।
- AIFPA ने सुप्रीम कोर्ट से फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल के लिए निर्धारित थ्रेशोल्ड की समीक्षा की मांग की है।
- विवाद का मुख्य बिंदु 'प्रति 100 ग्राम' बनाम 'प्रति सर्विंग' गणना पद्धति है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे नियमों को कमजोर करने और देरी करने की रणनीति बताया है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय में 10 सितंबर को होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई से ठीक पहले, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने एक नया मोड़ दे दिया है। ऑल इंडिया फूड प्रोसेसors एसोसिएशन (AIFPA), जिसमें नेस्ले इंडिया, आईटीसी और हल्दीराम जैसे दिग्गज शामिल हैं, ने एक हलफनामा दायर कर मांग की है कि पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लगाने के लिए प्रस्तावित वैज्ञानिक ढांचे की फिर से समीक्षा की जाए।
यह मामला मुख्य रूप से उन खाद्य पदार्थों से संबंधित है जिनमें चीनी, नमक और वसा (Fat) की मात्रा अधिक होती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पहले ही अदालत को बताया है कि वह फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग के समर्थन में है, लेकिन उद्योग का तर्क है कि इसके लिए निर्धारित मानक व्यावहारिक नहीं हैं।
विवाद की जड़: थ्रेशोल्ड और गणना
FSSAI ने ICMR-NIN के 2024 के दिशा-निर्देशों के आधार पर कुछ मानक तय किए हैं। इसके अनुसार, यदि किसी ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 4.2 ग्राम से अधिक वसा, 3 ग्राम से अधिक चीनी या 0.625 ग्राम से अधिक नमक है, तो उसे 'उच्च' श्रेणी में रखकर चेतावनी लेबल देना होगा। AIFPA का तर्क है कि इन निश्चित मानकों के बजाय 'प्रति सर्विंग' (Per Serving) या 'दैनिक सेवन के प्रतिशत' के आधार पर गणना की जानी चाहिए।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल तकनीकी बहस नहीं है, बल्कि एक बड़ा व्यावसायिक युद्ध है। यदि 'प्रति 100 ग्राम' का नियम लागू होता है, तो बड़ी संख्या में लोकप्रिय स्नैक्स और पेय पदार्थों पर 'अनहेल्दी' का ठप्पा लग जाएगा, जिससे उनकी बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा। उद्योग 'प्रति सर्विंग' मॉडल चाहता है क्योंकि सर्विंग साइज को छोटा दिखाकर पोषक तत्वों की मात्रा को कम दिखाया जा सकता है।
"उद्योग द्वारा मांगी गई समीक्षा वास्तव में एक विलंबन रणनीति है ताकि उन नियमों को कमजोर किया जा सके जो उपभोक्ताओं को अस्वास्थ्यकर भोजन के प्रति सचेत करते हैं।" - डॉ. अरुण गुप्ता, NAPi संयोजक।
दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि WHO और ICMR के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। उनका तर्क है कि सर्विंग साइज में हेरफेर करना आसान है, जबकि प्रति 100 ग्राम का मानक पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी होता है, जिससे उपभोक्ता दो अलग-अलग ब्रांडों के बीच सटीक तुलना कर सकते हैं।
| मानक (प्रति 100g) | प्रस्तावित सीमा (High Threshold) | उद्योग का तर्क |
|---|---|---|
| कुल वसा (Fat) | > 4.2 ग्राम | प्रति सर्विंग गणना हो |
| अतिरिक्त चीनी (Sugar) | > 3 ग्राम | अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन हो |
| नमक (Salt) | > 0.625 ग्राम | खपत पैटर्न पर विचार हो |
Frequently Asked Questions
1. फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPL) क्या है?
यह पैकेज के सामने वाले हिस्से पर एक सरल चेतावनी या संकेत होता है जो उपभोक्ता को बताता है कि उत्पाद में नमक, चीनी या वसा की मात्रा बहुत अधिक है।
2. AIFPA कौन है और इसकी मांग क्या है?
यह 600 से अधिक खाद्य निर्माताओं का एक संघ है। इसकी मांग है कि चेतावनी लेबल के लिए तय किए गए मानकों की दोबारा वैज्ञानिक जांच की जाए।