कर्नाटक सरकार और NIMHANS ने आत्महत्या के प्रयास करने वाले लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए प्रोजेक्ट USHAS को राज्य के 37 सरकारी अस्पतालों तक विस्तारित करने की घोषणा की है। यह पहल राज्य में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • प्रोजेक्ट USHAS अब कर्नाटक के सभी 31 जिला अस्पतालों और बेंगलुरु के 6 सरकारी अस्पतालों में लागू होगा।
  • आत्महत्या के प्रयास करने वाले जीवित बचे लोगों को 12 महीने तक संरचित मनोसामाजिक देखभाल और फॉलो-अप मिलेगा।
  • 2022 से अब तक इस प्रोजेक्ट के तहत 35,436 आत्म-नुकसान के मामलों का पंजीकरण किया गया है।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 2026 के अवसर पर, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS), कर्नाटक सरकार और हिमालय वेलनेस कंपनी ने एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल की घोषणा की है। प्रोजेक्ट USHAS (अर्बन सेल्फ-हार्म स्टडी), जो वर्तमान में 10 जिलों के 16 अस्पतालों में कार्यरत है, अब पूरे राज्य के 37 सरकारी अस्पतालों में विस्तारित किया जाएगा।

इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य उन लोगों के लिए एक संरचित 'पोस्ट-अटेम्पट केयर पाथवे' (प्रयास के बाद देखभाल मार्ग) स्थापित करना है, जो आत्महत्या के प्रयास से बच जाते हैं। अक्सर देखा गया है कि आपातकालीन विभागों में शारीरिक चोटों का इलाज तो हो जाता है, लेकिन मानसिक आघात और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की अनदेखी कर दी जाती है। प्रोजेक्ट USHAS इसी अंतर को भरने का प्रयास करता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विस्तार केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकृत करने की एक रणनीतिक कोशिश है। जब राज्य स्तर पर डेटा एकत्र किया जाता है और उसे नैदानिक परिणामों के साथ जोड़ा जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बन जाता है। यह कदम यह दर्शाता है कि सरकार अब मानसिक स्वास्थ्य संकट को एक चिकित्सा आपातकाल के रूप में देख रही है।

"आत्महत्या के प्रयास के बाद के पहले 12 महीने सबसे महत्वपूर्ण होते हैं; इस दौरान निरंतर मनोवैज्ञानिक समर्थन मृत्यु दर को नाटकीय रूप से कम कर सकता है।"

प्रोजेक्ट के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अब तक 26,385 जीवित बचे लोगों को परामर्श और जोखिम मूल्यांकन प्रदान किया गया है। सबसे चौंकाने वाला और सकारात्मक पहलू यह है कि जिन लोगों ने इस हस्तक्षेप (intervention) को प्राप्त किया, उनमें से केवल 1.3% ने दोबारा प्रयास किया और केवल 0.3% की मृत्यु हुई। यह साबित करता है कि सही समय पर सही हस्तक्षेप जान बचा सकता है।

विस्तारित कार्यक्रम के तहत, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता 45 से 75 मिनट के गहन सत्र आयोजित करेंगे। इसमें परिवार की भागीदारी को अनिवार्य बनाया गया है ताकि घर पर एक सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके। इसके साथ ही, एक समर्पित हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी जो संकट के समय तत्काल सहायता प्रदान करेगी।

विशेषतापुराना ढांचा (Current)नया विस्तार (Expanded)
अस्पतालों की संख्या16 अस्पताल37 अस्पताल
कवरेज10 जिलेसभी 31 जिला अस्पताल + 6 बेंगलुरु अस्पताल
देखभाल अवधिसीमित12 महीने का फॉलो-अप
क्या आप जानते हैं?: NCRB के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में 1,70,746 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें कर्नाटक उन राज्यों में शामिल है जहां संख्या काफी अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्रोजेक्ट USHAS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य आत्महत्या के प्रयास करने वाले लोगों को शारीरिक उपचार के साथ-साथ दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक सहायता और परामर्श प्रदान करना है ताकि वे दोबारा ऐसा प्रयास न करें।

प्रश्न 2: इस कार्यक्रम में परिवार की क्या भूमिका है?
उत्तर: कार्यक्रम में परिवारों को 'सेफ्टी प्लानिंग' में शामिल किया जाता है, क्योंकि परिवार का समर्थन रिकवरी की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होता है।