CMC वेल्लोर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग ने भारतीय ब्रैकीथेरेपी सोसाइटी के 16वें वार्षिक सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें भारत भर के 287 विशेषज्ञों ने कैंसर देखभाल के आधुनिक तरीकों पर चर्चा की।

  • CMC वेल्लोर ने IBSCON 2026 का आयोजन किया, जिसमें 287 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • सम्मेलन का मुख्य विषय 'सटीकता, वैयक्तिकरण और करुणा' के माध्यम से कैंसर देखभाल का पुनर्कल्पित करना था।
  • सिर, गर्दन के कैंसर और सॉफ्ट टिश्यू सार्कोमा के लिए विशेष कैडेवरिक वर्कशॉप आयोजित की गई।

तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग ने हाल ही में भारतीय ब्रैकीथेरेपी सोसाइटी के 16वें वार्षिक सम्मेलन (IBSCON 2026) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह प्रतिष्ठित आयोजन चिकित्सा जगत के दिग्गजों और उभरते विशेषज्ञों के लिए एक साझा मंच साबित हुआ, जहाँ कैंसर उपचार की नवीनतम तकनीकों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

इस सम्मेलन का उद्घाटन चेन्नई के अपोलो कैंसर अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार और निदेशक विजय आनंद रेड्डी ने किया। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय 'व्यापक कैंसर देखभाल में ब्रैकीथेरेपी की पुनर्कल्पना: सटीकता, वैयक्तिकरण और करुणा' (Re-imagining Brachytherapy in Comprehensive Cancer Care: Precision, Personalisation, and Compassion) रखा गया था, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक चिकित्सा अब केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगी की व्यक्तिगत जरूरतों और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी केंद्रित है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ब्रैकीथेरेपी—जिसमें रेडियोधर्मी स्रोतों को सीधे ट्यूमर के भीतर या उसके पास रखा जाता है—कैंसर उपचार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस सम्मेलन का महत्व इस बात में है कि यह पारंपरिक तरीकों से हटकर 'प्रिसिजन मेडिसिन' की ओर बढ़ने का संकेत देता है। जब विशेषज्ञ एक साथ आते हैं, तो नैदानिक त्रुटियों की संभावना कम होती है और उपचार की सफलता दर बढ़ती है।

“ब्रैकीथेरेपी में सटीकता और व्यक्तिगत दृष्टिकोण न केवल ट्यूमर को नष्ट करने में मदद करते हैं, बल्कि स्वस्थ ऊतकों को बचाकर रोगी के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार करते हैं।”

वैज्ञानिक सत्रों के दौरान, विशेषज्ञों ने कई व्याख्यान, पैनल चर्चाएं और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए। प्रतिनिधियों ने अपने मौलिक शोध और चुनौतीपूर्ण क्लिनिकल मामलों को प्रस्तुत किया, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान और पेशेवर नेटवर्किंग को बढ़ावा मिला।

इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एक हैंड्स-ऑन कैडेवरिक वर्कशॉप था। इसमें विशेष रूप से सिर, गर्दन के कैंसर और सॉफ्ट टिश्यू सार्कोमा के लिए ब्रैकीथेरेपी तकनीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रशिक्षुओं और डॉक्टरों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जो कि वास्तविक सर्जरी और उपचार के दौरान अत्यंत आवश्यक होता है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रैकीथेरेपी को 'आंतरिक विकिरण' (Internal Radiation) भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें रेडिएशन सोर्स को शरीर के अंदर लगाया जाता है, जबकि बाहरी रेडिएशन बीम शरीर के बाहर से भेजी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: IBSCON 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य कैंसर उपचार में ब्रैकीथेरेपी की आधुनिक तकनीकों, सटीकता और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण पर चर्चा करना और विशेषज्ञों के बीच ज्ञान साझा करना था।

प्रश्न 2: इस सम्मेलन में कुल कितने प्रतिनिधियों ने भाग लिया?
उत्तर: भारत भर से कुल 287 प्रतिनिधियों, संकायों और प्रशिक्षुओं ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।