चेन्नई के कौवेरी अस्पताल ने रीढ़ की हड्डी के उपचार के लिए न्यूनतम चीरे वाली एंडोस्कोपिक फ्यूजन सर्जरी पेश की है। यह तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कम दर्दनाक और अधिक प्रभावी साबित होगी।
- केवल 8 मिमी के छोटे चीरे के माध्यम से रीढ़ की हड्डी का फ्यूजन संभव।
- नसों के दबाव (nerve compression) और डिस्क रोगों के लिए अत्यधिक प्रभावी।
- मांसपेशियों और लिगामेंट्स को सुरक्षित रखते हुए न्यूनतम आक्रामक उपचार।
चेन्नई के अलवरपेट स्थित कौवेरी अस्पताल ने चिकित्सा जगत में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए एंडोस्कोपिक फ्यूजन सर्जरी की शुरुआत की है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए एक वरदान साबित होगी जिन्हें स्पाइनल फ्यूजन की आवश्यकता है, लेकिन जो पारंपरिक ओपन सर्जरी के जोखिमों और लंबे रिकवरी समय से बचना चाहते हैं।
एंडोस्कोपिक फ्यूजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक वर्किंग चैनल और हाई-डेफिनिशन कैमरा का उपयोग किया जाता है, जिसे मात्र 8 मिमी के छोटे चीरे के माध्यम से शरीर में डाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, सर्जन निरंतर विजुअलाइजेशन के तहत प्रभावित नसों को डीकंप्रेस करता है, डिस्क स्पेस को तैयार करता है और एक इंटरबॉडी इम्प्लांट लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आसपास की मांसपेशियों, हड्डियों और लिगामेंट्स को यथासंभव सुरक्षित रखना है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, एंडोस्कोपिक तकनीकों का उदय सर्जरी के बाद होने वाले ट्रॉमा को कम करता है। पारंपरिक सर्जरी में बड़े चीरे और मांसपेशियों को हटाने की आवश्यकता होती है, जिससे रिकवरी में हफ्तों लग जाते हैं। इसके विपरीत, यह नई तकनीक अस्पताल में रुकने की अवधि को कम करती है और संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम करती है, जिससे मरीज तेजी से अपने दैनिक जीवन में लौट सकते हैं।
"एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं डिस्क हर्नियेशन और तंत्रिका संपीड़न के लिए अत्यंत प्रभावी हैं, हालांकि प्रत्येक रोगी की शारीरिक स्थिति के आधार पर ही इसकी उपयुक्तता तय की जाती है।"
यह उपचार विशेष रूप से डिजेनेरेटिव लम्बर स्थितियों, जैसे कि डिस्क रोग, स्पाइनल स्टेनोसिस और निम्न-ग्रेड अस्थिरता के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा, यह उन मरीजों के लिए भी एक उत्कृष्ट विकल्प है जिन्हें पहले ओपन सर्जरी कराई जा चुकी है और जिनके शरीर में स्कार टिश्यू (scar tissue) बन गए हैं, जिससे दोबारा सर्जरी करना जोखिम भरा हो जाता है।
वरिष्ठ स्पाइन और ऑर्थोपेडिक सर्जन कीर्तिवासन पी ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह तकनीक क्रांतिकारी है, लेकिन यह सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं है। क्लिनिकल मूल्यांकन, इमेजिंग और समग्र स्वास्थ्य जांच के बाद ही यह निर्णय लिया जाता है कि मरीज इस प्रक्रिया के लिए योग्य है या नहीं। इस लॉन्च के अवसर पर स्पाइन और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख बालमुरली भी उपस्थित थे।
| विशेषता | पारंपरिक ओपन सर्जरी | एंडोस्कोपिक फ्यूजन |
|---|---|---|
| चीरे का आकार | बड़ा (कई इंच) | अत्यंत छोटा (8 मिमी) |
| रिकवरी समय | लंबा | तेजी से रिकवरी |
| मांसपेशियों का नुकसान | अधिक | न्यूनतम |
| जोखिम/संक्रमण | सापेक्ष रूप से अधिक | बहुत कम |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या एंडोस्कोपिक फ्यूजन सभी रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के लिए है?
उत्तर: नहीं, यह मुख्य रूप से डिस्क रोग, स्पाइनल स्टेनोसिस और कुछ विशिष्ट अस्थिरता के मामलों के लिए है। डॉक्टर मूल्यांकन के बाद ही इसकी सलाह देते हैं।
प्रश्न 2: इस सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
उत्तर: इसका सबसे बड़ा लाभ न्यूनतम चीरा और मांसपेशियों का संरक्षण है, जिससे दर्द कम होता है और रिकवरी बहुत तेज होती है।