बांग्लादेश ने दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में सभी शेष सदस्य देशों को SAARC और BIMSTEC के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग पर जोर देने का आह्वान किया। यह संदेश क्षेत्रीय एकता और आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बांग्लादेश ने SAARC और BIMSTEC के बीच सहयोग को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
  • दिल्ली में आयोजित बैठक में छह अन्य सदस्य देशों के सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधि प्रमुख उपस्थित थे।
  • क्षेत्रीय सहयोग से आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचा और सुरक्षा में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है।

द्वारा विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन ने सुरक्षा सलाहकारों और सभी छह शेष सदस्य देशों—बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड—के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया। इस मंच पर बांग्लादेश ने दो प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों, SAARC और BIMSTEC, के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

SAARC और BIMSTEC का इतिहास

दक्षिण एशिया के आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के लिए स्थापित SAARC (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) 1985 में गठित हुआ, जबकि BIMSTEC (बंगाल की खाड़ी, भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिण‑पूर्व एशिया और थाईलैंड सहयोग) 1997 में स्थापित हुआ। दोनों संगठनों के सदस्य देशों में कई समानताएँ हैं, लेकिन उनके कार्यक्षेत्र, प्राथमिकताएँ और संस्थागत शक्ति में अंतर रहा है, जिससे कभी‑कभी दोहरी मंचों पर दोहराव और प्रतिस्पर्धा का माहौल उत्पन्न हुआ।

बांग्लादेश का निरंतर संदेश

बांग्लादेश ने पहले भी SAARC को अपने विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा है। इस बार भी, बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि दो संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय एकता को कमजोर कर सकती है और आर्थिक अवसरों को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि “एक ही भौगोलिक परिदृश्य में दो अलग‑अलग मंचों को एकीकृत करके ही हम बुनियादी ढाँचा, ऊर्जा और व्यापार में सच्ची प्रगति कर सकते हैं।”

दिल्ली शिखर सम्मेलन का महत्व

यह बैठक केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही; सुरक्षा सलाहकारों को आमंत्रित करके क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों—जैसे आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और सीमा प्रबंधन—पर भी चर्चा की गई। साथ ही, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, जल संसाधन प्रबंधन और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में संभावित सहयोग के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इस तरह के बहु‑आयामी संवाद से दोनों संगठनों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने की आशा है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि बांग्लादेश के प्रस्ताव को वास्तविक नीति में बदल दिया जाए, तो SAARC और BIMSTEC के बीच एक साझा कार्य एजेंडा बन सकता है, जिससे दक्षिण एशिया में व्यापार बाधाओं को कम किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिशा में कदम उठाने से न केवल आर्थिक वृद्धि बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सामाजिक विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार, दिल्ली में आयोजित इस मंच ने दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए एक नई दिशा स्थापित करने की नींव रखी है।