उटाह में एक मॉल में भारतीय नागरिक सैयद सोहैलुद्दीन पर धार्मिक घृणा से प्रेरित चाकू हमला हुआ, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ऑनलाइन फंडरेज़र के माध्यम से विश्वभर के दाता ने 2.35 मिलियन डॉलर (₹2 करोड़ से अधिक) जुटाए, जिससे पीड़ित की चिकित्सा लागत में मदद होगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हैदराबाद के नागरिक पर अमेरिकन मॉल में धार्मिक घृणा आधारित हमला
  • दुनिया भर से ऑनलाइन फंडरेज़र के माध्यम से 2.35 मिलियन डॉलर (₹2 करोड़) जुटाए गए
  • अटैकर ने खुलकर कहा “मुसलमानों को मारना चाहता हूँ”, पुलिस ने इसे धार्मिक प्रेरित हत्या प्रयास माना

17 जुलाई 2026 को यूटा राज्य के वेस्ट वैली सिटी में स्थित वैली फेयर मॉल में एक भयावह घटना घटी। 48 वर्षीय पीटर माइकल लार्सन ने 15 बार चाकू घोंपकर 48 वर्षीय भारतीय नागरिक सैयद सोहैलुद्दीन को घायल किया, जब वह अपने देश‑भारत और धर्म‑इस्लाम के बारे में प्रश्नों का उत्तर देता रहा।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि और तुरंत प्रतिक्रिया

घटना के समय लार्सन ने सोहैलुद्दीन से उनका नाम, देश और धर्म पूछे, और जब उत्तर में “हां, मैं मुस्लिम हूँ” आया तो उसने तुरंत चाकू से हमला शुरू कर दिया। मॉल के ग्राहक और कर्मचारी ने साहसिक कार्रवाई कर अटैकर को दबोचा और पुलिस को सौंप दिया। स्थानीय पुलिस ने इस हमले को “धार्मिक रूप से प्रेरित हत्या का प्रयास” घोषित किया और लार्सन पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया।

वैश्विक वित्तीय सहयोग

सोहैलुद्दीन एकल कमाने वाले के रूप में अपने परिवार का समर्थन कर रहे थे; उनके पास स्वास्थ्य बीमा नहीं था और दो छोटे बच्चे तथा पत्नी पर उनका आर्थिक बोझ था। इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय दाताओं ने एक ऑनलाइन फंडरेज़र के माध्यम से 2.35 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2 करोड़) जुटाए। यह राशि अस्पताल में आवश्यक सर्जरी, पुनर्वास और भविष्य के इलाज की लागत को partially कवर करेगी।

राजनयिक पहल और भविष्य की चुनौतियाँ

सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस हमले पर गहरा शोक व्यक्त किया और पीड़ित के परिवार को निरंतर राजनयिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस घटना ने अमेरिका में बढ़ते धार्मिक घृणा अपराधों की गंभीरता को फिर से उजागर किया, साथ ही भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा एवं स्वास्थ्य बीमा कवरेज की आवश्यकता पर सवाल उठाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई और सामुदायिक समर्थन दोनों ही आवश्यक हैं, ताकि भविष्य में समान घटनाओं को रोका जा सके।

समापन

सोहैलुद्दीन की स्थिति अभी भी गंभीर है, लेकिन विश्वभर के दान और भारतीय दूतावास की सहायता से उन्हें जीवनरक्षा की उम्मीद है। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि धार्मिक सहनशीलता और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की परीक्षा भी है।