मोंट ब्लांक के बदनाम गोटर कूलायर (जिसे 'डेथ पास' भी कहा जाता है) पर भारी भूस्खलन के दौरान पर्वतारोहियों के बाल-बाल बचने का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सामने आया है। इस दौरान दो जांबाज पर्वतारोहियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों को सुरक्षित निकालने में मदद की।
- मोंट ब्लांक के सबसे खतरनाक हिस्से 'गोटर कूलायर' (डेथ पास) पर अचानक भारी भूस्खलन हुआ।
- एक पर्वतारोही द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में विशाल पत्थरों को तेजी से नीचे गिरते देखा जा सकता है।
- खतरे के बावजूद, दो पर्वतारोहियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना दूसरों को बचाने के लिए हाथ बढ़ाया।
यूरोप की सबसे ऊंची चोटी मोंट ब्लांक (Mont Blanc) पर चढ़ाई के दौरान एक बेहद डरावना और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में, पर्वतारोहियों का एक समूह उस समय मौत के मुंह से वापस आया जब वे मोंट ब्लांक के सबसे खतरनाक मार्ग, गोटर कूलायर (Goûter Couloir) को पार कर रहे थे। इस मार्ग को पर्वतारोहण की दुनिया में 'डेथ पास' (Death Pass) के नाम से जाना जाता है।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे विशालकाय चट्टानें और मलबे तेजी से नीचे की ओर गिर रहे हैं। धूल और पत्थरों के इस बवंडर के बीच पर्वतारोही खुद को बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। इस भयानक स्थिति में भी, एक पर्वतारोही और उसके साथी ने अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने खुद सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद भागने के बजाय वहीं रुककर अन्य पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने में मदद की।
गोटर कूलायर का खौफनाक इतिहास
गोटर कूलायर मोंट ब्लांक के क्लासिक रूट का एक ऐसा हिस्सा है जिसे पार करना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। यह लगभग 700 मीटर लंबा एक संकरा गलियारा है, जहां ऊपर से लगातार पत्थर गिरते रहते हैं। हर साल हजारों पर्वतारोही इस रास्ते से गुजरते हैं, और दुर्भाग्य से, यह क्षेत्र आल्प्स पर्वत श्रृंखला में सबसे अधिक दुर्घटनाओं और मौतों का गवाह रहा है। हाल के वर्षों में, जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि हुई है, जिससे पहाड़ों की बर्फ और पर्माफ्रॉस्ट (permafrost) पिघल रही है। इसके परिणामस्वरूप चट्टानें ढीली हो रही हैं और भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण आल्प्स जैसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पर्वतारोहण अब पहले से कहीं अधिक जोखिम भरा हो गया है। पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना पहाड़ों की प्राकृतिक संरचना को कमजोर कर रहा है, जिससे 'डेथ पास' जैसे मार्ग अब हर समय सक्रिय मौत के जाल में बदल रहे हैं। यह घटना न केवल पर्वतारोहियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि वैश्विक पर्यावरण नीतियों में तत्काल सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना आल्प्स के पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को अस्थिर कर रहा है, जिससे पारंपरिक चढ़ाई मार्ग अब अत्यधिक अप्रत्याशित और जानलेवा बन गए हैं।
नीचे दिए गए तुलनात्मक विवरण से समझें कि मोंट ब्लांक के दो प्रमुख मार्गों में जोखिम का स्तर कितना भिन्न है:
| विशेषता | गोटर कूलायर (क्लासिक रूट) | कॉस्मिक्स रूट (Three Mounts) |
|---|---|---|
| जोखिम का स्तर | अत्यधिक उच्च (लगातार पत्थर गिरना) | मध्यम से उच्च (हिमस्खलन का खतरा) |
| मुख्य खतरा | चट्टानों का खिसकना (Rockfall) | क्रेवास (Crevasses) और सेरैक फॉल |
| शारीरिक कठिनाई | मध्यम | उच्च (अधिक तकनीकी चढ़ाई) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: गोटर कूलायर को 'डेथ पास' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: गोटर कूलायर को 'डेथ पास' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां लगातार और अप्रत्याशित रूप से ऊपर से भारी चट्टानें गिरती हैं, जिससे यहां से गुजरने वाले पर्वतारोहियों की जान को हमेशा बेहद गंभीर खतरा बना रहता है।
प्रश्न 2: क्या जलवायु परिवर्तन मोंट ब्लांक पर भूस्खलन को बढ़ा रहा है?
उत्तर: हां, बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण पहाड़ों को आपस में जोड़ने वाली पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई बर्फ और मिट्टी) पिघल रही है, जिससे चट्टानें ढीली होकर तेजी से नीचे गिर रही हैं।