1975 में चीन में आए भीषण तूफान ने 62 बांधों को तबाह कर दिया था, जिससे लाखों लोगों की जान गई। बीजिंग ने इस त्रासदी को दशकों तक दुनिया से छिपाए रखा, जो आज के नेपाल बाढ़ संकट के बीच फिर चर्चा में है।
- 1975 में टाइफून नीना के कारण चीन के 62 बांध एक ही रात में ढह गए थे।
- इस आपदा में प्रत्यक्ष रूप से 26,000 और महामारी व अकाल से कुल 2.3 लाख लोगों की मौत हुई।
- बीजिंग ने इस भीषण त्रासदी की जानकारी को लगभग 20-30 वर्षों तक गुप्त रखा।
- वर्तमान में नेपाल में आई बाढ़ और चीन की सीमावर्ती परियोजनाओं ने फिर से सुरक्षा चिंताओं को जन्म दिया है।
इतिहास के पन्नों में 8 अगस्त 1975 की वह रात चीन के लिए किसी प्रलय से कम नहीं थी। जब टाइफून नीना ने हेनान प्रांत में भारी बारिश की, तो चीन का गर्व माना जाने वाला 'आयरन डैम' (Banqiao Dam) ताश के पत्तों की तरह ढह गया। यह केवल एक बांध का टूटना नहीं था, बल्कि एक ऐसी श्रृंखला थी जिसने एक ही रात में 62 बांधों को ध्वस्त कर दिया और देखते ही देखते तबाही का एक ऐसा मंजर तैयार किया जिसे दुनिया भूल नहीं सकती।
प्रत्यक्षदर्शी चेन बिन ने उस भयावह क्षण को याद करते हुए कहा था, "ऐसा लगा जैसे आसमान गिर रहा हो और धरती फट रही हो।" बांध टूटने के बाद पानी की 10 किलोमीटर चौड़ी दीवार ने नीचे स्थित गांवों को सोते समय ही निगल लिया। इस आपदा को दुनिया का तीसरा सबसे घातक बाढ़ हादसा माना जाता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि खराब इंजीनियरिंग और राजनीतिक जिद का परिणाम थी। माओ ज़ेडोंग के 'ग्रेट लीप फॉरवर्ड' के दौरान प्रकृति को वश में करने के जुनून में कई बांध बिना उचित जल निकासी व्यवस्था के बनाए गए थे। आज, जब नेपाल के भोटे कोशी-त्रिशुली नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है, तो चीन की सीमावर्ती बुनियादी परियोजनाओं और सूचनाओं को छिपाने की उसकी प्रवृत्ति पर वैश्विक सवाल उठ रहे हैं।
"सूचनाओं का अभाव और बांधों का दोषपूर्ण डिजाइन प्राकृतिक आपदा को मानव निर्मित नरसंहार में बदल देता है।"
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस आपदा के बाद उपजी भूख और बीमारियों ने मौतों के आंकड़े को आसमान पर पहुंचा दिया। जहां प्रिंसटन विश्वविद्यालय के अध्ययन ने 1 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया, वहीं मानवाधिकार समूहों ने इसे 2.3 लाख मौतों तक बताया। चीन के सरकारी मीडिया ने इस त्रासदी को दबाने की पूरी कोशिश की, और इसकी सच्चाई दुनिया के सामने आने में दशकों लग गए।
वर्तमान परिदृश्य में, भारत और नेपाल के विशेषज्ञ चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास मेडोग काउंटी में बनाए जा रहे 60,000-मेगावाट के विशाल बांध को लेकर बेहद चिंतित हैं। यह उच्च भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है, जो भविष्य में एक बड़े खतरे का संकेत दे सकता है।
Frequently Asked Questions
1. 1975 की चीन की बांध आपदा में कुल कितने लोग मारे गए थे?
आधिकारिक आंकड़ों और विशेषज्ञों के बीच मतभेद है, लेकिन अनुमान है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.3 लाख लोगों की मौत हुई थी।
2. क्या चीन ने नेपाल की बाढ़ के बारे में चेतावनी दी थी?
रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने नेपाल को भोटे कोशी-त्रिशुली नदी प्रणाली में आने वाली अचानक बाढ़ के बारे में समय पर चेतावनी नहीं दी थी।