नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में हाई अलर्ट जारी किया गया है, जबकि अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,400 से अधिक लोग लापता हैं।

  • भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।
  • बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,400 से अधिक लोग लापता हैं।
  • भारत ने नेपाल की मदद के लिए C-130J विमान से 11 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल में एक बार फिर बड़ी आपदा की आहट सुनाई दे रही है। भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अत्यधिक बढ़ने और तेज आवाजें आने के बाद रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के नदी तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने ट्वीट कर इस खतरे की पुष्टि की है और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है।

इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने अब तक भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 675 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लापता लोगों में 275 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिन्हें खोजने के लिए सेना और स्थानीय एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 108 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 598 भारतीय नागरिक चीन की सीमा से सुरक्षित नेपाल वापस आ चुके हैं। वर्तमान में करीब 900 भारतीय नागरिक चीन की तरफ सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हैं और भारतीय दूतावास उनके निरंतर संपर्क में है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि तिब्बत और नेपाल के बीच बहने वाली नदियां जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों के मुहाने पर हैं। ऐसे में अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) दोनों देशों के लिए एक गंभीर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे का संकट बन गई है। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाना यह दिखाता है कि इस बार आपदा का पैमाना स्थानीय क्षमताओं से कहीं अधिक बड़ा है।

भारत सरकार ने संकट की इस घड़ी में नेपाल की मदद के लिए त्वरित कदम उठाए हैं। भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से 11 टन राहत सामग्री की चौथी खेप नेपाल भेजी गई है। इस खेप में न केवल आवश्यक खाद्य सामग्री और दवाएं शामिल हैं, बल्कि उन्नत सर्च-रेस्क्यू उपकरण, तकनीकी टीमें और अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच विशेषज्ञ भी भेजे गए हैं।

"हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती बाढ़ की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि भारत, नेपाल और चीन को मिलकर एक साझा वास्तविक समय (Real-time) चेतावनी प्रणाली विकसित करनी होगी।"

Historical Background

भोटेकोशी नदी का इतिहास बाढ़ और भूस्खलन से भरा रहा है। यह नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल से होते हुए भारत में प्रवेश करती है, जहां यह अंततः कोशी नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है। कोशी नदी को अपनी विनाशकारी बाढ़ के कारण 'बिहार का शोक' भी कहा जाता है। साल 2014 और 2021 में भी इस क्षेत्र में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूरा बेल्ट भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील और अस्थिर है।

श्रेणी (Category)वर्तमान स्थिति / संख्या
कुल पुष्ट मौतें675
कुल लापता लोग2,400 से अधिक
लापता भारतीय नागरिक275 से अधिक
सुरक्षित बचाए गए भारतीय108
चीन में सुरक्षित / लौटे भारतीय1,498 (900 चीन में सुरक्षित, 598 लौटे)
Did You Know?: भोटेकोशी नदी तिब्बत (चीन) से निकलती है और इसे वहां 'पोइक्वा' के नाम से जाना जाता है, जो नेपाल में प्रवेश करते ही भोटेकोशी बन जाती है।

Frequently Asked Questions

Q1: भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ क्यों आ रही है?
A1: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अत्यधिक बारिश और ग्लेशियर फटने (GLOF) के कारण नदी का जलस्तर अचानक खतरनाक सीमा को पार कर गया है।

Q2: भारत सरकार नेपाल में क्या राहत कार्य चला रही है?
A2: भारत ने C-130J विमान के जरिए 11 टन राहत सामग्री, खोज और बचाव उपकरण, तकनीकी टीम और डीएनए फोरेंसिक विशेषज्ञों को नेपाल भेजा है।