बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया और कहा कि शांतिपूर्ण समाधान मानवता की साझा प्राथमिकता है।

  • पीएम मोदी ने रूस और यूक्रेन से 'अंतहीन युद्ध' को छोड़कर शांति की ओर बढ़ने का आग्रह किया।
  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत और रूस ने ऊर्जा, रक्षा और व्यापार में रणनीतिक सहयोग की समीक्षा की।
  • विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने खुलासा किया कि रूसी सेना में भर्ती हुए 51 भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है।

बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर एक महत्वपूर्ण राजनयिक मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र रूस-यूक्रेन संघर्ष था, जिसमें पीएम मोदी ने एक मार्मिक संदेश दिया कि दुनिया को अब अंतहीन युद्ध के चक्र से बाहर निकलकर स्थायी शांति की ओर बढ़ना चाहिए।

संघर्ष पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की ओर बढ़ाया गया हर कदम दुनिया को नई आशा से भरता है। उन्होंने गांधी और बुद्ध की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का संदेश स्पष्ट है: केवल शांति और कूटनीति का मार्ग ही एकमात्र विकल्प है। यह रुख एक ध्रुवीकृत वैश्विक परिदृश्य में भारत की मध्यस्थ की भूमिका को और मजबूत करता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत रूस के साथ अपनी "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बना रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले पुतिन से युद्ध समाप्त करने का आग्रह करके, मोदी भारत को ग्लोबल साउथ के एक नैतिक नेता के रूप में स्थापित कर रहे हैं, जो वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए स्थिरता की वकालत कर रहा है।

संघर्ष के अलावा, दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की कि चर्चाओं में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग शामिल थे। उन्होंने विशेष रूप से व्यापार, आर्थिक और सांस्कृतिक मामलों पर 27वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के परिणामों पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य व्यापार बास्केट का विविधीकरण और रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाना है।

"युद्ध अर्थव्यवस्था से शांति अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण केवल एक राजनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि 21वीं सदी के लिए एक मानवीय अनिवार्यता है।"

मुलाकात का एक अत्यंत गंभीर बिंदु रूसी सेना में भर्ती भारतीय नागरिकों की स्थिति थी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भर्ती हुए 227 भारतीयों में से 139 को मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने 51 भारतीय नागरिकों की दुखद मृत्यु की पुष्टि की और कहा कि मॉस्को में भारतीय दूतावास शेष कर्मियों की वापसी के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।

बैठक का समापन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। पीएम मोदी ने 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करने की इच्छा व्यक्त की।

केंद्र बिंदु भारत का रुख रूस का रुख
यूक्रेन संघर्ष संवाद और कूटनीति रणनीतिक सुरक्षा हित
व्यापार निर्यात का विविधीकरण व्यापार मात्रा में वृद्धि
वैश्विक व्यवस्था बहुपक्षवाद (BRICS/SCO) बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
क्या आप जानते हैं?: पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान रूसी राष्ट्रपति की लिमोजिन कार में एक साथ यात्रा करने की परंपरा है, जो उनके बीच घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पीएम मोदी का राष्ट्रपति पुतिन के लिए प्राथमिक संदेश क्या था?
पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को तत्काल समाप्त करने का आग्रह किया और कहा कि मानवता के कल्याण के लिए दुनिया को 'अंतहीन युद्ध' से शांति की ओर बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 2: रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की स्थिति क्या है?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, भर्ती हुए 227 भारतीयों में से 139 को सेना से मुक्त कर दिया गया है, जबकि दुर्भाग्यवश 51 लोगों की मृत्यु हो गई है।