भोटकोशी बाढ़ के बाद नेपाल में मदद के नाम पर सोशल मीडिया पर फर्जी फंडरेजिंग का जाल बिछाया गया है। एक विस्तृत जांच में पाया गया कि कई अकाउंट्स केवल पैसे ठगने के लिए बनाए गए हैं।

  • भोटकोशी बाढ़ के बाद इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 20 से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान की गई।
  • ज्यादातर फर्जी अकाउंट्स ने व्यक्तिगत QR कोड का उपयोग किया, न कि किसी आधिकारिक संस्था का।
  • स्कैमर्स ने लोगों को गुमराह करने के लिए AI-जनरेटेड इमेज और असम की पुरानी बाढ़ के वीडियो का इस्तेमाल किया।

नेपाल के भोटकोशी में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। जहां एक ओर दुनिया भर से मदद के हाथ बढ़े, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने इस त्रासदी को कमाई के अवसर के रूप में देखा। एक गहन OSINT (ओपन सोर्स इंटेलिजेंस) जांच में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया पर 'नेपाल एड' और 'नेपाल हेल्प' जैसे नाम से कई फर्जी प्रोफाइल सक्रिय हैं।

जांच के दौरान पाया गया कि 20 से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स में से 15 केवल बाढ़ आने के बाद बनाए गए थे। इनमें से 11 प्रोफाइल तो अगस्त 2026 में ही शुरू हुए थे। कुछ पुराने अकाउंट्स ने अपनी पहचान बदलकर खुद को राहत कार्य करने वाली संस्था के रूप में पेश किया, ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का शोषण है। जब लोग संकट के समय मदद करना चाहते हैं, तो ऐसे स्कैम न केवल पैसे चुराते हैं, बल्कि भविष्य में वास्तविक राहत कार्यों के प्रति जनता के विश्वास को भी कम करते हैं। यह डिजिटल युग में 'ट्रस्ट डेफिसिट' की एक गंभीर समस्या को दर्शाता है।

इन फर्जी अकाउंट्स की सबसे बड़ी पहचान उनके द्वारा साझा किए गए UPI QR कोड थे। जांच में पाया गया कि ये सभी कोड किसी संस्था के बजाय व्यक्तिगत नामों पर पंजीकृत थे। इतना ही नहीं, कुछ स्कैमर्स ने अपनी पहचान छुपाने के लिए AI का सहारा लिया और नेपाल की स्थिति दिखाने के लिए भारत के असम की पुरानी बाढ़ के फुटेज का उपयोग किया।

"डिजिटल डोनेशन के दौर में, बिना आधिकारिक सत्यापन के किसी भी व्यक्तिगत QR कोड पर भरोसा करना वित्तीय जोखिम और धोखाधड़ी को आमंत्रण देना है।"

जब जांच टीम ने इन अकाउंट संचालकों से संपर्क करने की कोशिश की, तो राजस्थान के एक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि वह फंड जुटा रहा था, लेकिन वह यह बताने में असमर्थ रहा कि पैसा वास्तव में पीड़ितों तक कैसे पहुंचेगा। एक अन्य प्रोफाइल ने तो 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नाम का सहारा लेकर लोगों को ठगने की कोशिश की।

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रवक्ता हेमराज आर्यल ने जनता को चेतावनी दी है कि वे केवल सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बैंक खातों और QR कोड के माध्यम से ही योगदान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दान केवल 'प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष' (PM Disaster Relief Fund) जैसे आधिकारिक खातों में ही जाना चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: OSINT का अर्थ 'ओपन सोर्स इंटेलिजेंस' है, जिसका उपयोग सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा के माध्यम से छिपे हुए तथ्यों और धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. मैं कैसे पहचान सकता हूँ कि कोई डोनेशन पेज फर्जी है?
यदि अकाउंट हाल ही में बना है, पोस्ट बहुत कम हैं, और QR कोड किसी व्यक्ति के नाम पर है न कि संस्था के, तो वह फर्जी हो सकता है।

2. नेपाल बाढ़ राहत के लिए सुरक्षित तरीका क्या है?
केवल प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष (PM Disaster Relief Fund) या सरकार द्वारा प्रमाणित आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही दान करें।