बीशकेक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक दिग्गजों के साथ रणनीतिक मुलाकातें कीं, जबकि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के साथ कोई संवाद नहीं हुआ।
- पीएम मोदी ने शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ संक्षिप्त मुलाकात की।
- भारत ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, एआई और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर जोर दिया।
- प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के बीच कोई बातचीत या हैंडशेक नहीं हुआ।
किर्गिस्तान की राजधानी बीशकेक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक कूटनीति के कई दिलचस्प पहलू देखने को मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्मेलन स्थल पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। इन मुलाकातों को क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीएम मोदी की सक्रियता केवल प्रमुख राष्ट्रपतियों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराकची और ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन से भी मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ उनके गर्मजोशी भरे आलिंगन ने वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत स्वीकार्यता को प्रदर्शित किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत इस मंच का उपयोग न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एक साझा वैश्विक मोर्चा बनाने के लिए कर रहा है। विशेष रूप से, जब भारत आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, तो एससीओ में उसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
"क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी ढांचे का सुदृढ़ीकरण ही एशिया में दीर्घकालिक शांति का एकमात्र मार्ग है।"
शिखर सम्मेलन के एजेंडे में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना' (RATS) के तहत आतंकवाद विरोधी सहयोग पर केंद्रित लगभग 27 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारत ने स्पष्ट रूप से आतंकवाद, कट्टरपंथ के विरोध और क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे को प्राथमिकता दी है।
वहीं, सम्मेलन के दौरान एक स्पष्ट 'कोल्ड वाइब' देखा गया जब पीएम मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच कोई संवाद नहीं हुआ। दोनों नेता गोलमेज सम्मेलन में एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत छोर पर बैठे नजर आए, जो दक्षिण एशियाई कूटनीति में जारी तनाव को दर्शाता है।
Frequently Asked Questions
1. एससीओ समिट में भारत का मुख्य फोकस क्या था?
भारत का मुख्य ध्यान आतंकवाद का मुकाबला करने, कट्टरपंथ को रोकने और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने पर था।
नहीं, शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत या औपचारिक हैंडशेक नहीं हुआ।