नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने रसुवा फ्लैश फ्लड से हुए आर्थिक नुकसान का आकलन करने और जलवायु वित्त दावों को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय संसदीय उप-समिति का गठन किया है।
- रसुवा फ्लैश फ्लड के आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करने के लिए 7 सदस्यीय पैनल का गठन।
- नेपाल वैश्विक उत्सर्जकों से जलवायु वित्त और मुआवजे की मांग कर रहा है।
- इस आपदा में अब तक 1,365 लोगों की मृत्यु और 5,000 से अधिक लापता।
नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रसुवा में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करने और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों की जांच करने के लिए एक सात सदस्यीय संसदीय उप-समिति का गठन किया है। यह कदम काठमांडू की उस कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत वह विकसित देशों और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जकों से जलवायु मुआवजे की मांग कर रहा है।
सिंहदरबार में प्रतिनिधि सभा की वित्त समिति की बैठक के दौरान इस पैनल का गठन किया गया। सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सांसद सुशीला खड़का इस उप-समिति का समन्वय करेंगी। पैनल को 26 अगस्त को आई बाढ़ के आर्थिक प्रभाव और जलवायु वित्त से जुड़े जटिल मुद्दों का गहन विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया है। वित्त समिति के अध्यक्ष कृष्ण हरि बुधातोकी ने स्पष्ट किया है कि समिति को 18 सितंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक आंतरिक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि एक वैश्विक संदेश है। नेपाल यह साबित करना चाहता है कि जिन देशों का वैश्विक उत्सर्जन में योगदान नगण्य है, वे जलवायु परिवर्तन की सबसे भीषण मार झेल रहे हैं। यह पैनल रसुवा आपदा को एक 'केस स्टडी' के रूप में पेश करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'लॉस एंड डैमेज फंड' (Loss and Damage Fund) से अधिक सहायता प्राप्त की जा सके।
इस आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक बर्फ-चट्टान हिमस्खलन (Ice-rock avalanche) से हुई थी। इसके परिणामस्वरूप भोटेकोशी नदी में जलस्तर अचानक बढ़ा, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल घरों और सड़कों को नष्ट किया, बल्कि महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुँचाया है।
"हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना अब एक वार्षिक आपदा बन गया है, जिसके लिए वैश्विक जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।"
पैनल में नेपाली कांग्रेस के नरेंद्र कुमार केरुंग, सीपीएन (चौम) के परशु राम तामांग, सीपीएन-यूएमएल के पुष्प राज कंडेल और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के लीमा अधिकारी, पुष्पा चौधरी और सुशांत वैदिक जैसे प्रमुख सदस्य शामिल हैं। यह बहुदलीय प्रतिनिधित्व दर्शाता है कि जलवायु वित्त का मुद्दा नेपाल में राजनीतिक सहमति का केंद्र बन चुका है।
नुकसान का विवरण
| श्रेणी | प्रभाव/आंकड़े |
|---|---|
| मृतकों की संख्या | 1,365 |
| लापता लोग | 5,000+ |
| मुख्य प्रभावित नदी | भोटेकोशी नदी |
| प्राथमिक कारण | बर्फ-चट्टान हिमस्खलन |
Frequently Asked Questions
1. रसुवा बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?
यह बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े बर्फ-चट्टान हिमस्खलन के कारण आई थी, जिससे भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया।
2. नेपाल जलवायु वित्त (Climate Finance) की मांग क्यों कर रहा है?
नेपाल का तर्क है कि उसका उत्सर्जन नगण्य है, लेकिन वह विकसित देशों द्वारा किए गए प्रदूषण के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तनों और आपदाओं का खामियाजा भुगत रहा है।