हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से हूती विद्रोहियों पर सीधे अमेरिकी सैन्य हमले करने का आग्रह किया था, जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया।

  • सऊदी क्राउन प्रिंस MBS ने कथित तौर पर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के लिए डोनाल्ड ट्रंप से दो बार संपर्क किया।
  • ट्रंप ने कथित तौर पर क्षेत्र में गहरे तनाव से बचने के लिए सीधे हमलों के अनुरोध को खारिज कर दिया।
  • अमेरिका ने इसके बजाय सऊदी अभियान के लिए खुफिया जानकारी और लक्ष्यीकरण सहायता का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया।

मध्य पूर्व की कूटनीति की जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए, रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले शुरू करने के लिए कई बार आग्रह किया था। Axios और अन्य प्रमुख आउटलेट्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से दो अलग-अलग अवसरों पर संपर्क किया, जिसमें उन्होंने ईरानी समर्थित मिलिशिया द्वारा उत्पन्न तत्काल खतरे पर जोर दिया।

हूती आंदोलन लंबे समय से सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए एक समस्या रहा है, जो सऊदी साम्राज्य के भीतर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए परिष्कृत ड्रोन और मिसाइल तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। अमेरिकी हस्तक्षेप के अनुरोध लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच आए, जहां अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर हूतियों के हमलों ने वैश्विक व्यापार मार्गों को बाधित किया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि यह बातचीत ट्रंप युग के दौरान अमेरिकी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को उजागर करती है। जबकि अमेरिका ने रियाद को व्यापक रसद और खुफिया सहायता प्रदान की, यमन में एक और सीधे युद्ध में शामिल होने के प्रति स्पष्ट रणनीतिक अनिच्छा थी। यह बताता है कि अमेरिका-सऊदी गठबंधन के चरम पर भी, 'अमेरिका फर्स्ट' सिद्धांत सऊदी हितों के लिए प्राथमिक सैन्य प्रवर्तक के रूप में कार्य करने की इच्छा से अधिक प्रभावी था।

हमलों से इनकार करना क्षेत्र में ईरानी प्रॉक्सी का प्राथमिक लक्ष्य बनने से बचने के लिए अमेरिका की एक सोची-समझी जोखिम प्रबंधन रणनीति को दर्शाता है।

इस संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 2014 की है, जब हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। सऊदी अरब ने 2015 में हस्तक्षेप किया और मान्यता प्राप्त सरकार को बहाल करने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। पिछले कुछ वर्षों में, यह संघर्ष सऊदी अरब और ईरान के बीच एक प्रॉक्सी युद्ध में बदल गया है।

सीधे हमलों की अस्वीकृति के बावजूद, अमेरिका ने अपने सहयोगी का साथ नहीं छोड़ा। रिपोर्टों से पता चलता है कि अमेरिका ने अपनी खुफिया जानकारी का विस्तार किया और सऊदी सेना को हूती खतरों को अधिक प्रभावी ढंग से बेअसर करने में मदद करने के लिए उन्नत लक्ष्यीकरण क्षमताएं प्रदान कीं। इस 'पर्दे के पीछे से समर्थन' दृष्टिकोण ने अमेरिका को प्रत्यक्ष युद्ध हताहतों की राजनीतिक लागत के बिना अपना प्रभाव बनाए रखने की अनुमति दी।

क्या आप जानते हैं?: हूती विद्रोहियों को आधिकारिक तौर पर 'अंसार अल्लाह' के रूप में जाना जाता है और उन्होंने अपने लाल सागर अभियानों के माध्यम से अरबों डॉलर के वैश्विक व्यापार को बाधित किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सऊदी क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी हमलों की मांग क्यों की?
MBS अमेरिकी सेना की श्रेष्ठ मारक क्षमता का उपयोग करके सऊदी तेल प्रतिष्ठानों और शिपिंग लाइनों के लिए हूती खतरे को समाप्त करना चाहते थे।

अमेरिका ने इसके बजाय सऊदी अरब की मदद कैसे की?
अमेरिका ने अपनी लड़ाकू सेनाओं को तैनात करने के बजाय उच्च स्तरीय खुफिया जानकारी और लक्ष्यीकरण डेटा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया।