विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स के पिछले 20 वर्षों के विकास पर चर्चा करते हुए इस वर्ष के शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे और थीम की जानकारी साझा की। उन्होंने सदस्यता और सहयोग तंत्र में आए महत्वपूर्ण बदलावों पर जोर दिया।

  • ब्रिक्स ने पिछले दो दशकों में अपनी सदस्यता और कार्यसूची में व्यापक विस्तार किया है।
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस वर्ष के शिखर सम्मेलन के लिए रणनीतिक थीम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
  • सहयोग तंत्र और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने पर विशेष ध्यान।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक संबोधन के दौरान इस वर्ष के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के मुख्य विषय और उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में विकसित हुआ है जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की साझा आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

जयशंकर ने उल्लेख किया कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स की यात्रा अत्यंत प्रभावशाली रही है। शुरुआत में एक विचार के रूप में शुरू हुआ यह समूह अब एक औपचारिक संस्था बन चुका है, जिसकी सदस्यता का दायरा बढ़ा है और जिसका एजेंडा अब अधिक समावेशी और व्यापक हो गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का विषय वैश्विक शासन में सुधार और बहुध्रुवीय दुनिया में सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि ब्रिक्स का विस्तार और इसकी बदलती थीम यह संकेत देती है कि दुनिया अब पश्चिमी प्रभुत्व वाले ढांचे से हटकर एक अधिक संतुलित व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत की भूमिका इसमें एक 'सेतु' (Bridge) की तरह है, जो विकसित और विकासशील देशों के बीच सामंजस्य स्थापित कर रहा है।

"ब्रिक्स का विकास केवल संख्यात्मक विस्तार नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति के केंद्र का खिसकने का प्रमाण है।"

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन वैश्विक आर्थिक असंतुलन को चुनौती देने के लिए किया गया था। समय के साथ, इसमें नए सदस्यों के जुड़ने से इसकी भू-राजनीतिक शक्ति और बढ़ गई है। अब यह समूह व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा करने का प्राथमिक मंच बन गया है।

शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है कि कैसे सदस्य देश वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में सुधार कर सकते हैं और विकासशील देशों के लिए ऋण राहत और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को सुलभ बना सकते हैं।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स शब्द मूल रूप से 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील द्वारा गढ़ा गया था, जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि ये अर्थव्यवस्थाएं 2050 तक दुनिया पर राज करेंगी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स के विस्तार का भारत के लिए क्या महत्व है?
उत्तर: विस्तार से भारत को ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में नए व्यापारिक अवसर खोजने में मदद मिलती है।

प्रश्न 2: इस वर्ष के ब्रिक्स सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: मुख्य उद्देश्य वैश्विक शासन में सुधार करना और सदस्य देशों के बीच सहयोग तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाना है।