नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस यात्रा के दौरान एलएसी (LAC) पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को पुनः बहाल करने पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।

  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली बार भारत आएंगे।
  • प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक में एलएसी पर शांति और सीमा विवाद मुख्य मुद्दा होगा।
  • व्यापार घाटा, वीजा प्रक्रियाओं और सीधी उड़ानों की बहाली पर चर्चा संभावित है।

भारत की राजधानी नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आयोजन वैश्विक राजनीति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दुनिया की एक बड़ी जनसंख्या और आर्थिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन का सबसे चर्चित पहलू चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह यात्रा 2019 के ममल्लापुरम जुड़ाव और 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्षों के बाद पहली बार हो रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच कज़ान, तियानजिन और बिश्केक में मुलाकातें हुई हैं, लेकिन भारत की धरती पर यह पहली औपचारिक यात्रा होगी जो संबंधों को एक नई दिशा दे सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच तनाव को कम करने का एक रणनीतिक अवसर है। यदि एलएसी (LAC) पर सीमा वि-सैन्यीकरण (de-escalation) पर सहमति बनती है, तो यह न केवल क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन को भी प्रभावित करेगा।

"सीमा विवाद का समाधान किए बिना पूर्ण सामान्यीकरण संभव नहीं है, लेकिन ब्रिक्स जैसा मंच संवाद के द्वार खोलने के लिए अनिवार्य है।"

संभावित द्विपक्षीय बैठक के मुख्य एजेंडे में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति और स्थिरता, सीमा विवाद का स्थायी समाधान और व्यापार घाटे को कम करना शामिल है। इसके अलावा, महामारी के बाद से बाधित हुई वीजा प्रक्रियाओं और सीधी उड़ानों की बहाली पर भी चर्चा होने की प्रबल संभावना है।

हाल के दिनों में कूटनीतिक स्तर पर काफी सक्रियता देखी गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की चीन यात्रा और पूर्वी सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की बैठकों ने इस शिखर सम्मेलन के लिए जमीन तैयार की है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों और जल संसाधन जैसे संवेदनशील मुद्दों ने अभी भी तनाव बनाए रखा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और चीन के संबंध 1962 के युद्ध के बाद से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 2020 के गलवान संघर्ष ने विश्वास के स्तर को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया था। तब से, भारत ने 'शांति और स्थिरता' को संबंधों की पूर्व शर्त बनाया है, जबकि चीन ने इसे अलग रखने की कोशिश की है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) समूह अब अपने विस्तार के दौर में है, जिससे यह ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभरा है और G7 के प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है।

Frequently Asked Questions

1. क्या शी जिनपिंग और पीएम मोदी की अलग से मुलाकात होगी?
हाँ, शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक की प्रबल संभावना है जिसमें सीमा विवाद पर चर्चा होगी।

2. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य एलएसी पर तनाव कम करना और आर्थिक व राजनयिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाना है।