कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूट ने संकेत दिया है कि भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। यह महत्वपूर्ण विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा के दौरान संपन्न हो सकता है।
- भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं।
- द्विपक्षीय निवेश की क्षमता $1 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
- कनाडा भारत में अपने निवेश को बढ़ाने के लिए टैक्स और रेगुलेटरी सुधारों की मांग कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित 'द हिंदू माइंड' कार्यक्रम के दौरान, कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूट ने भारत-कनाडा संबंधों में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दिया। उन्होंने पुष्टि की कि दोनों देश एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिसे इस वर्ष के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में होने वाली कनाडा यात्रा के समय तक तैयार हो सकता है।
उच्चायुक्त कूट ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 12 वर्षों की तुलना में पिछले छह महीनों में अधिक प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 में बातचीत फिर से शुरू होने के बाद से दोनों देशों ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। यह तेजी दर्शाती है कि दोनों राष्ट्र अब अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this trade deal is not just about tariffs, but about strategic resource security. Canada's dominance in critical minerals like potash, titanium, and LNG makes it an indispensable partner for India's industrial growth and energy security. If the CEPA is signed, it could decouple economic interests from diplomatic frictions, creating a stable corridor for multi-billion dollar investments.
"The shift from a 12-year stalemate to a 9-month sprint indicates a profound strategic realignment in how New Delhi and Ottawa view their economic interdependence."
वर्तमान में, भारत और कनाडा के बीच व्यापार लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो दोनों देशों की क्षमता के मुकाबले काफी कम है। हालांकि, निवेश का स्तर काफी ऊंचा है। कनाडाई पेंशन फंड और संस्थागत निवेशकों ने भारत में लगभग 80 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है, जिससे कनाडा सिंगापुर और यूएई के साथ भारत के सबसे बड़े निवेशकों की श्रेणी में आता है।
उच्चायुक्त ने विशेष रूप से खनन क्षेत्र (Mining Sector) में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने उल्लेख किया कि कनाडा के पास दुनिया का बेहतरीन माइनिंग अनुभव है, लेकिन भारत में उनकी उपस्थिति नगण्य है। यदि भारत अपने नियमों में ढील देता है, तो सैकड़ों कनाडाई कंपनियां भारत में अन्वेषण और प्रसंस्करण शुरू कर सकती हैं। इसके बदले में, भारत कनाडा की टंगस्टन खदानों में निवेश कर सकता है, जो भारतीय रक्षा उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
| क्षेत्र (Sector) | वर्तमान स्थिति | भविष्य की संभावना |
|---|---|---|
| कुल व्यापार | ~$8 बिलियन USD | महत्वपूर्ण वृद्धि (CEPA के बाद) |
| कनाडाई निवेश | ~$80 बिलियन USD | $1 ट्रिलियन तक की क्षमता |
| प्रमुख संसाधन | सीमित सहयोग | पोटाश, एलएनजी, टाइटेनियम |
हालांकि, कूट ने स्पष्ट किया कि निवेश की इस गति को बनाए रखने के लिए भारत को कुछ टैक्स संबंधी मुद्दों और नियामक बाधाओं को दूर करना होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कनाडा का केंद्रीय वित्त मंत्रालय के साथ निरंतर संवाद जारी है। उनका मानना है कि डी-रेगुलेशन (Deregulation) से कनाडाई निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा।
Frequently Asked Questions
1. CEPA क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) एक व्यापक व्यापार समझौता है जो टैरिफ कम करता है और सेवाओं व निवेश के लिए बाजार खोलता है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी वृद्धि होती है।
2. प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या होगा?
इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य ट्रेड डील को अंतिम रूप देना और रणनीतिक व आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है।