अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पेरू में अपने तीन देशों के रणनीतिक दौरे का समापन किया, जहाँ उन्होंने नशीली दवाओं और अवैध प्रवासन पर कड़े प्रहार पर जोर दिया, जबकि लीमा की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन हुए।
- मार्को रूबियो की पेरू यात्रा का उद्देश्य नशीली दवाओं के खिलाफ लड़ाई और प्रवासन नियंत्रण को मजबूत करना है।
- ट्रम्प प्रशासन 'नार्को-आतंकवाद' के खिलाफ सैन्य हमलों सहित सख्त रुख अपना रहा है।
- पेरू वर्तमान में जबरन वसूली और अपराध की भारी वृद्धि से जूझ रहा है।
- चीन ने लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभुत्व का विरोध करते हुए क्षेत्रीय संप्रभुता की बात की है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने लीमा, पेरू की एक महत्वपूर्ण यात्रा के साथ अपने तीन देशों के दक्षिण अमेरिकी दौरे का समापन किया है। यह राजनयिक मिशन पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व को फिर से स्थापित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापक रणनीति का एक मुख्य हिस्सा है, जिसमें नशीली दवाओं के उन्मूलन, अवैध प्रवासन पर रोक और विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
रूबियो की पेरू की नई राष्ट्रपति कीको फुजिमोरी के साथ बैठक कोलंबिया और इक्वाडोर के ट्रम्प-समर्थक नेताओं के साथ मुलाकात के बाद हुई है। वाशिंगटन का मुख्य उद्देश्य ड्रग तस्करों के खिलाफ लड़ने और अवैध प्रवासन को कम करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों का एक क्षेत्रीय गठबंधन बनाना है। इस नई रणनीति में "नार्को-आतंकवाद" के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शामिल है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी बलों द्वारा संदिग्ध जहाजों को जब्त करना शामिल है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह दौरा केवल कानून प्रवर्तन के बारे में नहीं है, बल्कि यह 'मनरो सिद्धांत' (Monroe Doctrine) को पुनर्जीवित करने का एक सुनियोजित प्रयास है। फुजिमोरी और अबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला जैसे रूढ़िवादी नेताओं के साथ गठबंधन करके, वाशिंगटन लैटिन अमेरिका में ड्रग्स के प्रवाह और चीन के बढ़ते भू-राजनीतिक प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा दीवार बनाने की कोशिश कर रहा है।
राजनयिक सहयोग से हटकर सैन्य-नेतृत्व वाले नार्कोटिक्स अभियानों की ओर बढ़ना अमेरिका के हस्तक्षेपवाद के एक नए युग का संकेत है।
इस यात्रा की तात्कालिकता पेरू के आंतरिक संकट से भी जुड़ी है। देश में अपराध में भारी वृद्धि हुई है; आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जबरन वसूली की रिपोर्ट 2019 में 2,421 से बढ़कर 2025 तक 26,000 से अधिक हो गई है। जवाब में, पेरू ने लीमा और कालाओ बंदरगाह में 60 दिनों की आपात स्थिति घोषित की है और जेलों में सुरक्षा कड़ी कर दी है।
हालांकि, यह यात्रा विवादों से मुक्त नहीं रही। जैसे ही रूबियो लीमा पहुंचे, कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर "पेरू से यांकी बाहर निकालो" के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इसे अमेरिकी नव-उपनिवेशवाद करार दिया और तर्क दिया कि पेरू को अपनी अंतरराष्ट्रीय संधियों का निर्णय स्वयं करने का अधिकार है।
वैश्विक तनाव को बढ़ाते हुए, पेरू में चीनी दूतावास ने एक तीखा बयान जारी कर कहा कि पश्चिमी गोलार्ध "किसी का पिछवाड़ा (backyard) नहीं है।" यह लैटिन अमेरिकी संसाधनों और राजनीतिक वफादारी पर नियंत्रण के लिए वाशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है।
| पैरामीटर/फोकस | अमेरिकी रणनीति (रूबियो/ट्रम्प) | चीनी दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| क्षेत्रीय दृष्टिकोण | सुरक्षा-केंद्रित, एंटी-ड्रग गठबंधन | संप्रभु साझेदारी, आर्थिक संबंध |
| मुख्य लक्ष्य | प्रवासन और ड्रग्स पर नियंत्रण | व्यापार और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार |
| प्रमुख सिद्धांत | पुनर्जीवित मनरो सिद्धांत | गैर-हस्तक्षेप/पारस्परिक लाभ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अमेरिका ने 'नार्को-आतंकवाद' के खिलाफ लड़ाई क्यों घोषित की है?
ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि ड्रग कार्टेल अब अर्धसैनिक संगठनों में बदल गए हैं जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, इसलिए सैन्य कार्रवाई आवश्यक है।
प्रश्न 2: पेरू ने आंतरिक अपराध से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
पेरू ने लीमा और कालाओ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आपातकाल लागू किया है और जेलों से भागने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी शुरू की है।