स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्लियाना में इजरायल के पहले दूतावास के उद्घाटन के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री जेनेज़ जान्सा के इस फैसले ने देश में राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है और उनके खिलाफ महाभियोग की मांग तेज हो गई है।

  • स्लोवेनिया में इजरायल के पहले दूतावास का उद्घाटन हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
  • प्रधानमंत्री जेनेज़ जान्सा ने पूर्व सरकार की 'नरसंहार' वाली नीति को पलटते हुए इजरायल के साथ संबंध मजबूत किए।
  • विपक्ष ने विदेश नीति में बदलाव के कारण प्रधानमंत्री जान्सा और विदेश मंत्री टोन काइजर के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया है।

स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्लियाना में बुधवार को उस समय तनाव फैल गया जब हजारों प्रदर्शनकारियों ने शहर की सड़कों पर मार्च निकाला। यह विरोध प्रदर्शन स्लोवेनिया में इजरायल के पहले दूतावास के उद्घाटन के जवाब में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने "हम शांति और फिलिस्तीन के लिए एक साथ खड़े हैं" और "नरसंहार आत्मरक्षा नहीं है" जैसे बैनरों के साथ सरकार की इस कूटनीतिक चाल का कड़ा विरोध किया।

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री जेनेज़ जान्सा के सत्ता में आने के बाद आया है, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब की नीतियों को पूरी तरह उलट दिया है। गोलोब सरकार ने गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई को "नरसंहार" करार दिया था और फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी थी। इसके विपरीत, जान्सा ने सत्ता संभालते ही सरकारी भवन से फिलिस्तीनी झंडा हटा दिया और इजरायल पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया।

यह मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक दूतावास का उद्घाटन नहीं है, बल्कि स्लोवेनिया के आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतीक है। जबकि सरकार इजरायल के साथ "ऐतिहासिक मित्रता" की बात कर रही है, देश की जनता और विपक्ष इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन मान रहे हैं। यह कदम स्लोवेनिया को यूरोपीय संघ के उन देशों की विपरीत दिशा में ले जाता है जो इजरायल पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

स्लोवेनिया की अधिकांश जनता या तो इजरायल के खिलाफ है या तटस्थ है, और सरकार का यह अचानक बदलाव जनमत के बिल्कुल विपरीत है।

राजनीतिक मोर्चे पर, उदारवादी 'फ्रीडम मूवमेंट' और 'लेफ्ट पार्टी' ने मिलकर प्रधानमंत्री जान्सा के खिलाफ संसद में महाभियोग का प्रस्ताव रखा है। उनका आरोप है कि यह विदेश नीति केवल इजरायल के हितों की सेवा करती है और यह संभवतः मार्च चुनाव के दौरान इजरायल द्वारा जान्सा को दिए गए कथित समर्थन का "बदला" है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, स्लोवेनिया का यह कदम तब आया है जब ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश वेस्ट बैंक की अवैध बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस दिन को "ऐतिहासिक" बताया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में इजरायल का कूटनीतिक अलगाव बढ़ता जा रहा है।

नीतिगत पहलू रॉबर्ट गोलोब सरकार (पूर्व) जेनेज़ जान्सा सरकार (वर्तमान)
फिलिस्तीन की स्थिति राज्य के रूप में मान्यता दी सरकारी भवन से झंडा हटाया
इजरायल पर प्रतिबंध हथियार और बस्ती आयात पर प्रतिबंध सभी प्रतिबंध समाप्त किए
गाजा युद्ध पर नजरिया "नरसंहार" के रूप में वर्णित मजबूत कूटनीतिक संबंध और सहयोग
क्या आप जानते हैं?: जून में 'डेलो' अखबार द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 56% स्लोवेनियाई लोग इजरायल के साथ करीबी संबंधों का विरोध करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. स्लोवेनिया में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री जान्सा द्वारा इजरायल के पहले दूतावास के उद्घाटन और गाजा में जारी युद्ध के बीच इजरायल के साथ संबंधों को फिर से स्थापित करने के कारण हो रहे हैं।

2. प्रधानमंत्री जान्सा के खिलाफ महाभियोग क्यों लाया गया है?
विपक्ष का आरोप है कि जान्सा की नई विदेश नीति केवल इजरायल के हितों को लाभ पहुँचाती है और यह स्लोवेनियाई जनता की इच्छा के विरुद्ध है।