ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले एक संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति जताई है, जिसमें 'बिना उकसावे के आक्रमण' की निंदा करने और वैश्विक शासन में बदलाव लाने पर जोर दिया गया है।

  • ब्रिक्स देशों ने नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के लिए एक साझा घोषणापत्र पर सहमति व्यक्त की है।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्य देशों को 'नियम मानने वालों' के बजाय 'नियम बनाने वालों' में बदलने का आह्वान किया।
  • ट्रोइका सिस्टम और डिजिटल रिपॉजिटरी जैसे नए तंत्रों का प्रस्ताव दिया गया है।

भारत की राजधानी नई दिल्ली में होने वाले बहुप्रतीक्षित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मिली है। सूत्रों के अनुसार, सभी सदस्य राष्ट्रों ने एक संयुक्त घोषणापत्र के मसौदे पर सहमति बना ली है। यह घोषणापत्र न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर सदस्य देशों के साझा दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करेगा।

शिखर सम्मेलन के स्वागत संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक विजनरी दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों को अब केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने वाला (rule-takers) नहीं, बल्कि वैश्विक शासन प्रणाली में नियमों को आकार देने वाला (rule-shapers) बनना चाहिए। यह बयान वैश्विक दक्षिण (Global South) की बढ़ती आकांक्षाओं और पश्चिमी प्रभुत्व वाली व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सहमति वैश्विक स्तर पर एक नए शक्ति केंद्र के उदय का संकेत है। जब रूस, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश एक स्वर में बोलते हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे UN और IMF में सुधार की मांग को और मजबूती देता है। यह कदम विशेष रूप से उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है जो एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) चाहते हैं।

"ब्रिक्स का यह साझा दृष्टिकोण वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो विकासशील देशों की सामूहिक आवाज को बुलंद करता है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एक 'ट्रोइका सिस्टम' और एक साझा डिजिटल रिपॉजिटरी का प्रस्ताव दिया है। इस तंत्र का उद्देश्य शिखर सम्मेलनों के बीच निर्णयों के कार्यान्वयन की निगरानी करना और डेटा साझाकरण को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। यह कदम ब्रिक्स को केवल एक चर्चा मंच से बदलकर एक क्रियान्वयन-उन्मुख संगठन बनाने की दिशा में है।

हालांकि, इस शिखर सम्मेलन के बीच आंतरिक राजनीतिक दबाव भी देखा गया है। भारत में विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने सरकार से आग्रह किया है कि वह ब्रिक्स मंच का उपयोग भारत के राजनयिक कद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचा उठाने के लिए करे। यह दर्शाता है कि ब्रिक्स की सफलता केवल बाहरी कूटनीति नहीं, बल्कि घरेलू राजनीतिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स समूह की स्थापना का उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना है, और अब यह दुनिया की कुल जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स (BRICS) क्या है?
यह ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों के बीच एक अंतर-सरकारी संगठन है।

2. 'ट्रोइका सिस्टम' का क्या अर्थ है?
यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें वर्तमान, पिछले और आगामी शिखर सम्मेलन के मेजबान देश मिलकर कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।