प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें वैश्विक नौवहन और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बीच समुद्री सुरक्षा पर उच्च स्तरीय चर्चा।
  • अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता।
  • भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने और BRICS के ढांचे के भीतर सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

नई दिल्ली/काज़ान: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ एक गहन द्विपक्षीय बैठक की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित नौवहन न केवल व्यापार के लिए, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है।

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने उन चुनौतियों पर चर्चा की जो वर्तमान में हिंद महासागर और फारस की खाड़ी जैसे रणनीतिक जलमार्गों में उत्पन्न हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री डाकुओं, भू-राजनीतिक तनावों और अन्य खतरों से नाविकों की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने ईरान के साथ अपने पुराने राजनयिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने की इच्छा जताई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत का यह कदम रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे मध्य एशिया और यूरोप के बीच एक सेतु बनाती है। समुद्री सुरक्षा पर जोर देकर, भारत न केवल अपने व्यापारिक हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है जो 'मुक्त और खुले' समुद्री रास्तों का समर्थन करता है।

समुद्री सुरक्षा पर भारत का जोर यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अब वैश्विक व्यापारिक गलियारों की सुरक्षा में एक सक्रिय नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाना चाहती है।

ऐतिहासिक रूप से, भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स रहे हैं। यह परियोजना भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करती है। इस शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाएं इस परियोजना को नई गति दे सकती हैं और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा दे सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने BRICS के भीतर बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसमें आतंकवाद का मुकाबला करना, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना शामिल है।

क्या आप जानते हैं?: चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों को सीधे मध्य एशिया से जोड़ता है।

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, नाविकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता पर चर्चा करना था।

2. BRICS सम्मेलन में भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनकर उभर रहा है और आर्थिक विकास व सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।