BRICS शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। बीजिंग ने दोनों देशों को 'एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले भागीदार' बनने का संकेत दिया है।

  • प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक।
  • सात साल बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा।
  • LAC पर तनाव के बाद संबंधों को सामान्य करने की दिशा में बड़ा कदम।
  • BRICS शिखर सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक स्थिरता पर जोर।

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। यह मुलाकात पिछले सात वर्षों में राष्ट्रपति शी की पहली भारत यात्रा है, जिसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजिंग ने इस बैठक से पहले स्पष्ट किया है कि दोनों देश अपने संबंधों को एक 'रणनीतिक ऊंचाई' और 'दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य' से देखेंगे।

भारत और चीन के बीच संबंध 2020 की गर्मियों में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए सैन्य गतिरोध के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। इससे पहले, अक्टूबर 2019 में राष्ट्रपति शी ने चेन्नई के पास महाबलीपुरम की यात्रा की थी, जहाँ एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ था। वर्तमान वार्ता का मुख्य उद्देश्य उस तनाव को कम करना और आपसी विश्वास को फिर से स्थापित करना है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the restoration of India-China ties is not merely a bilateral necessity but a global imperative. As the two most populous nations, their cooperation directly impacts the stability of the Indo-Pacific region and the effectiveness of the BRICS bloc. A shift from confrontation to 'partners helping each other succeed' could reshape Asian geopolitics for the next decade.

"A stable and predictable relationship between the world's two largest emerging economies is essential for global economic resilience and the credibility of the Global South."

भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर संचार बढ़ाने और मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश अच्छे पड़ोसी और सहयोगी के रूप में कार्य करेंगे।

वहीं, चीन में भारत के राजदूत विक्रम डोरास्वामी ने CGTN के लिए लिखे एक लेख में कहा कि 2.8 अरब लोगों के हित में एक स्थिर संबंध होना आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले एक साल में कार्य स्तर (working level) पर निरंतर जुड़ाव ने विश्वास बहाली की प्रक्रिया को गति दी है, जिसका परिणाम अब इस उच्च-स्तरीय बैठक के रूप में दिख रहा है।

विशेषता2019 शिखर सम्मेलन (महाबलीपुरम)2026 प्रस्तावित बैठक (नई दिल्ली)
मुख्य उद्देश्यअनौपचारिक संवाद और विश्वास निर्माणतनाव के बाद संबंधों की बहाली
संदर्भसहयोग का दौरLAC गतिरोध के बाद का रिकवरी फेज
वैश्विक मंचद्विपक्षीय यात्राBRICS शिखर सम्मेलन
क्या आप जानते हैं?: भारत और चीन मिलकर दुनिया की लगभग 35% से अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता वैश्विक बाजार के लिए महत्वपूर्ण है।

Frequently Asked Questions

1. राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से LAC विवाद के बाद संबंधों को सामान्य करना है।

2. भारत-चीन संबंधों में तनाव का मुख्य कारण क्या था?
वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हुए सैन्य गतिरोध के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव बढ़ गया था।