ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बाहरी दबाव ईरान की शक्ति को कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने ब्रिक्स (BRICS) और भारत के साथ संबंधों पर भी महत्वपूर्ण चर्चा की।

  • ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर राज्य आतंकवाद और आर्थिक नाकाबंदी का आरोप लगाया।
  • राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने परमाणु हथियारों के दावों को खारिज करते हुए NPT के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
  • भारत और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से क्षेत्रीय व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • ब्रिक्स (BRICS) को अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन ने एक विशेष साक्षात्कार में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, उन्होंने सीधे तौर पर पश्चिमी शक्तियों, विशेष रूप से अमेरिका को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "वे हमसे क्यों लड़ रहे हैं?" उन्होंने तर्क दिया कि दशकों के प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद, ईरान न तो टूटा है और न ही उसके नेता झुके हैं।

पेज़ेश्कियन ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता पर जोर देते हुए कहा कि ईरान खुद का बचाव कर रहा है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर 'राज्य आतंकवाद' का आरोप लगाया, जिसमें क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे पर हमले और आर्थिक नाकाबंदी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की कार्रवाई केवल अपनी रक्षा के लिए है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि ईरान का यह रुख वैश्विक शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत है। ईरान अब केवल रक्षात्मक नहीं है, बल्कि वह ब्रिक्स जैसे संगठनों के माध्यम से एक 'बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था' (Multipolar World Order) बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने का प्रयास करता है।

ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि पश्चिमी प्रतिबंध अब ईरान की घरेलू स्थिरता या उसकी विदेश नीति को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं।

परमाणु नीति के संबंध में, राष्ट्रपति ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान गैर-प्रसार संधि (NPT) का पूरी तरह से पालन कर रहा है और उसका उद्देश्य शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दोहरे मानदंडों की आलोचना करते हुए पूछा कि इजरायल के परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया मौन क्यों है?

भारत के साथ संबंधों पर बात करते हुए, पेज़ेश्कियन ने सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने चाबहार बंदरगाह के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने ओमान के साथ समुद्री सुरक्षा, विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में राजनयिक चर्चाओं का भी उल्लेख किया।

Did You Know?: हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है?
नहीं, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया है कि ईरान NPT का पालन कर रहा है और उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

2. भारत और ईरान के बीच व्यापार का मुख्य केंद्र क्या है?
चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों का मुख्य केंद्र है।