एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया गया है कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे 'टावर 22' पर हुए घातक ड्रोन हमले से पहले चीनी कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियों ने ईरान को हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें प्रदान की थीं। इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिससे बीजिंग और तेहरान के बीच सैन्य सहयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हुए घातक ड्रोन हमले को चीनी कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी से जोड़ा है।
- जनवरी 2024 में 'टावर 22' पर हुए इस हमले में तीन अमेरिकी सैन्य रिजर्व कर्मियों की मौत हुई थी और 40 से अधिक घायल हुए थे।
- यह रिपोर्ट चीन, ईरान और मध्य पूर्व में सक्रिय उनके प्रॉक्सी नेटवर्क के बीच बढ़ते सैन्य-तकनीकी सहयोग को उजागर करती है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य चौकी 'टावर 22' (Tower 22) पर जनवरी 2024 में हुए घातक ड्रोन हमले से पहले चीनी वाणिज्यिक (कमर्शियल) सैटेलाइट कंपनियों ने ईरान को इस बेस की उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें प्रदान की थीं। इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और दर्जनों अन्य घायल हुए थे। इस खुलासे ने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
28 जनवरी, 2024 को सीरियाई सीमा के पास जॉर्डन में स्थित एक सुदूर मरुस्थलीय चौकी टावर 22 पर एक आत्मघाती ड्रोन ने हमला किया था। इस हमले में अमेरिकी सेना के सार्जेंट विलियम जेरोम रिवर्स, स्पेशलिस्ट कैनेडी लाडोन सैंडर्स और स्पेशलिस्ट ब्रियोना एलेक्सॉन्ड्रिया मॉफेट की मौत हो गई थी। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस हमले को इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया समूह 'कताइब हिजबुल्लाह' (Kata'ib Hezbollah) ने अंजाम दिया था। अब खुफिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इस हमले की सटीक योजना बनाने में चीनी सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया गया था।
चीन और ईरान का खुफिया गठजोड़
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, चीन की निजी और अर्ध-सरकारी रिमोट-सेंसिंग कंपनियों ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को टावर 22 की विस्तृत तस्वीरें बेची थीं। बाद में इन तस्वीरों को ईरान ने अपने प्रॉक्सी समूहों को सौंप दिया ताकि वे अमेरिकी सैनिकों की सटीक स्थिति और बेस की कमजोरियों को चिह्नित कर सकें। हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर इस संघर्ष में तटस्थ रहने का दावा करता है, लेकिन उसकी कमर्शियल कंपनियों द्वारा इस प्रकार के संवेदनशील डेटा का हस्तांतरण बीजिंग की परोक्ष भूमिका पर गंभीर सवाल उठाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: बढ़ता हुआ त्रिपक्षीय संकट
अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से, मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थित समूहों द्वारा 170 से अधिक हमले किए जा चुके हैं। चीन ने ऐतिहासिक रूप से मध्य पूर्व में अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं। 2021 में, दोनों देशों ने 25 साल के रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी खुफिया समुदाय का मानना है कि चीन का तेजी से बढ़ता कमर्शियल स्पेस सेक्टर अब पश्चिमी देशों के खिलाफ एक हाइब्रिड युद्ध उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक खतरनाक मोड़ है। अब तक, केवल महाशक्तियों के पास ही सटीक सैन्य हमलों के लिए आवश्यक उपग्रह खुफिया जानकारी होती थी। लेकिन चीनी वाणिज्यिक फर्मों द्वारा इस तकनीक के व्यवसायीकरण ने ईरान जैसे देशों और उनके हिंसक प्रॉक्सी समूहों को अत्यंत सटीक हमले करने की क्षमता प्रदान कर दी है। यह अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती है और आने वाले दिनों में चीन पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों का कारण बन सकता है।
| इकाई (Entity) | घटना में भूमिका (Role in Incident) | प्रमुख क्षमता (Key Capability) |
|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | पीड़ित पक्ष; सैन्य बेस पर हमला हुआ | वैश्विक सैन्य उपस्थिति और उन्नत हवाई रक्षा |
| चीन (संस्थाएं) | कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी प्रदान की | हाई-रिजॉल्यूशन रिमोट सेंसिंग और स्पेस टेक |
| ईरान और प्रॉक्सी | हमले की योजना बनाई और ड्रोन लॉन्च किया | सस्ते आत्मघाती ड्रोन और सटीक खुफिया नेटवर्क |
ईरानी मिलिशिया द्वारा चीनी वाणिज्यिक सैटेलाइट डेटा का उपयोग अंतरिक्ष-आधारित खुफिया जानकारी के खतरनाक लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है, जिसने पारंपरिक सैन्य खुफिया बाधाओं को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: टावर 22 क्या है और यह कहाँ स्थित है?
उत्तर: टावर 22 जॉर्डन में सीरिया और इराक की सीमाओं के त्रिकोणीय जंक्शन के पास स्थित एक रणनीतिक अमेरिकी सैन्य रसद (लॉजिस्टिक्स) बेस है।
प्रश्न 2: क्या चीनी सरकार ने सीधे तौर पर ये तस्वीरें ईरान को दी थीं?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, ये तस्वीरें चीनी कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियों द्वारा प्रदान की गई थीं। हालांकि, चीन में इन कंपनियों पर सरकार का कड़ा नियंत्रण होता है, इसलिए अमेरिकी अधिकारी इसे बीजिंग की मौन सहमति के रूप में देख रहे हैं।