चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध की कड़ी निंदा की है। उन्होंने वैश्विक स्थिरता के लिए ब्रिक्स देशों को अग्रणी भूमिका निभाने और संप्रभुता के उल्लंघन का विरोध करने का आह्वान किया।

  • शी जिनपिंग ने ईरान-मध्य पूर्व युद्ध को वैश्विक हितों के विरुद्ध बताया।
  • ब्रिक्स देशों से राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान और शांति बहाली की अपील।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच गलवान संघर्ष के बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात।
  • एआई (AI) सहयोग और वैश्विक विकास पर समन्वय बढ़ाने पर जोर।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान और व्यापक मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय स्तर पर भारी तबाही मचाई है, बल्कि यह वैश्विक हितों के भी विपरीत है। शी ने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे "इतिहास के सही पक्ष" में खड़े हों और शांति एवं स्थिरता बहाल करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

राष्ट्रपति शी ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों को किसी भी देश की राष्ट्रीय संप्रभुता के उल्लंघन और आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का पुरजोर विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन, ब्रिक्स के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में शांति और शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए अपना उचित योगदान देगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि शी जिनपिंग का यह बयान अमेरिका और इजरायल के प्रभाव को कम करने और वैश्विक दक्षिण (Global South) के नेतृत्व में चीन की स्थिति को मजबूत करने की एक रणनीतिक कोशिश है। पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों के बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है, जिससे चीन खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में पेश कर रहा है।

"मध्य पूर्व में अस्थिरता केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक अस्तित्वगत खतरा है, जिसे केवल बहुपक्षीय कूटनीति से सुलझाया जा सकता है।"

इस शिखर सम्मेलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों में सुधार की कोशिश है। राष्ट्रपति शी की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ होने वाली मुलाकात 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारतीय धरती पर पहली द्विपक्षीय बैठक है। गलवान संघर्ष ने दोनों देशों के बीच विश्वास को गंभीर रूप से चोट पहुंचाई थी, जिसके बाद भारत ने कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था।

हालांकि, पिछले सात वर्षों में सैन्य कमांडरों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के स्तर पर निरंतर संवाद हुआ है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली इस बात का संकेत है कि संबंधों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। फिर भी, 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी घटनाओं और पाकिस्तान को चीन द्वारा दिए गए सामरिक समर्थन के कारण भारत अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए है।

क्या आप जानते हैं?: गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच विश्वास की कमी इतनी गहरी थी कि कई वर्षों तक सीधी हवाई यात्रा पूरी तरह बंद रही थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों से क्या अपील की?
उत्तर: उन्होंने अपील की कि ब्रिक्स देश राष्ट्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का विरोध करें और मध्य पूर्व में शांति बहाल करने में नेतृत्व करें।

प्रश्न 2: भारत और चीन के संबंधों में तनाव का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प, जिसमें भारतीय सैनिकों की जान गई थी, संबंधों में गिरावट का मुख्य कारण बनी।