नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत की मध्यस्थता में ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों देशों ने शांति, संप्रभुता और ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
- नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और यूएई के बीच कूटनीतिक सफलता।
- दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और संयम बरतने पर सहमति जताई।
- घोषणापत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और ऊर्जा प्रवाह की निरंतरता पर जोर दिया गया।
- भारत ने इस महत्वपूर्ण आम सहमति को प्राप्त करने में मुख्य भूमिका निभाई।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। छह महीने से जारी पश्चिम एशिया युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक महत्वपूर्ण आम सहमति बनाने में सफलता प्राप्त की है। यह समझौता न केवल ब्रिक्स देशों के लिए, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साथ शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई जब दोनों देशों के बीच पिछले छह महीनों से तनाव चरम पर था।
तनाव के बीच शांति का मार्ग
संयुक्त घोषणापत्र के पैराग्राफ 28 में, ब्रिक्स नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी पक्ष अधिकतम संयम बरतें और ऐसी कार्रवाइयों से बचें जो स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकती हैं। यह घोषणापत्र दोनों देशों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें क्षेत्रीय संप्रभुता और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने साबित कर दिया है कि गहरे मतभेदों के बावजूद, कूटनीति के माध्यम से वैश्विक संकटों पर आम सहमति बनाई जा सकती है।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले महीने तक ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई थी। यूएई, जो ईरान के हमलों का शिकार रहा है, और ईरान, जो यूएई को अमेरिका का प्रॉक्सी मानता है, दोनों के बीच का यह संतुलन भारत की कुशल कूटनीति का परिणाम है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ी है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे यूएई जैसे देशों में सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हुई हैं। इससे पहले, मई 2026 में नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत इस मतभेद को सुलझाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था, लेकिन इस बार 'ब्रिक्स शेरपाओं' की कड़ी मेहनत रंग लाई है।
Frequently Asked Questions
1. ईरान और यूएई के बीच तनाव का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध और ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए जाने वाले हमले हैं, जो यूएई की सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।
2. भारत की इस समझौते में क्या भूमिका थी?
भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की और एक ऐसे घोषणापत्र का मसौदा तैयार किया जिसमें दोनों की राष्ट्रीय चिंताओं का सम्मान किया गया।