नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास को बाधित करने वाले महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक के 'हथियारीकरण' के प्रति आगाह किया। उन्होंने सदस्य देशों के बीच लचीलापन, नवाचार और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
- पीएम मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' को साझा प्रगति के लिए खतरा बताया।
- ब्रिक्स देशों के बीच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- बीमारियों और आपदाओं के लिए एक एकीकृत ब्रिक्स 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' पर सहमति बनी।
- स्टार्टअप्स के लिए 'ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड' का प्रस्ताव रखा गया।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अस्थिरता के बीच सदस्य देशों के बीच एकजुटता और लचीलापन (Resilience) बढ़ाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में, उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि यदि महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और उन्नत तकनीक का उपयोग भू-राजनीतिक लाभ के लिए 'हथियार' के रूप में किया जाता है, तो यह पूरी दुनिया की साझा प्रगति में बाधा उत्पन्न करेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते। उन्होंने महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वैश्विक तनाव आम लोगों के जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। मोदी ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व) पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) की कुंजी है। यदि इन संसाधनों का 'हथियारीकरण' होता है, तो यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अस्थिर कर सकता है और विकासशील देशों के लिए तकनीकी पहुंच को कठिन बना सकता है।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability)—पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता में इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिनमें स्टार्टअप्स के लिए 'ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड' और किसानों के लिए 'ब्रिक्स डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क' शामिल हैं।
तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारीकरण हमारी साझा प्रगति में बाधा डाल सकता है। इसलिए, हमें तकनीक अपनाने में समावेशिता पर जोर देना चाहिए।
आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए, प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क का उल्लेख किया। इसके अलावा, संक्रामक रोगों के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' और आपदा प्रबंधन के लिए डेटा एकीकरण दिशानिर्देशों पर सहमति बनी है। यह कदम ब्रिक्स देशों को भविष्य के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकटों के लिए अधिक तैयार करेगा।
अंत में, मोदी ने समावेशी विकास पर जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स का सहयोग केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इसके लिए 'ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल' और 'ब्रिक्स कनेक्ट' जैसे मंचों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. पीएम मोदी ने खनिजों के 'हथियारीकरण' से क्या तात्पर्य बताया?
इसका अर्थ है कि कुछ देश अपने संसाधनों (जैसे महत्वपूर्ण खनिज) का उपयोग अन्य देशों पर राजनीतिक दबाव बनाने या उन्हें आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए कर सकते हैं।
2. ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड क्या है?
यह एक प्रस्तावित कोष है जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के भीतर स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देना और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ना है।