नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक नेताओं से अपील की कि वे भू-राजनीतिक तनावों से निपटने और ग्लोबल साउथ के विकास के लिए एकजुट हों।
- पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारीकरण वैश्विक प्रगति को बाधित कर सकता है।
- भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता।
- महामारी की रोकथाम के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला ढांचे पर सहमति बनी।
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में अपना विशेष संबोधन दिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो जैसे वैश्विक नेता शामिल थे। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता को लेकर भारत का दृष्टिकोण साझा किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने "प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के हथियारीकरण" को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी एकाधिकार और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को बाधित करने के प्रयास विकासशील देशों और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ (Global South) की प्रगति में बड़ी बाधा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि साझा समृद्धि के लिए इन संसाधनों का निष्पक्ष वितरण और खुली पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारत की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने अपने प्रयासों को चार स्तंभों पर केंद्रित किया है: लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation), और स्थिरता (Sustainability)। मुझे बेहद खुशी है कि आप सभी के सहयोग से हम अपने साझा दृष्टिकोण को एक 'जीत-जीत' (Win-Win) की स्थिति में बदलने में सफल रहे हैं।"
| पहलू | प्रौद्योगिकी का हथियारीकरण | महत्वपूर्ण खनिजों का एकाधिकार |
|---|---|---|
| मुख्य प्रभाव | एआई, सेमीकंडक्टर और सॉफ्टवेयर तक पहुंच को बाधित करता है। | ईवी बैटरी, सौर पैनल और रक्षा तकनीक के निर्माण को रोकता है। |
| लक्षित संवेदनशीलता | विकासशील देशों में डिजिटल संप्रभुता और नवाचार को नुकसान। | हरित ऊर्जा संक्रमण और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान। |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिज भविष्य की हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर उद्योगों की रीढ़ हैं। यदि इन पर कुछ देशों का एकाधिकार हो जाता है, तो यह विकासशील देशों की आर्थिक संप्रभुता को खतरे में डाल देगा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रही है, जहां संसाधनों का राजनीतिकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था को पंगु बना सकता है।
"महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति श्रृंखलाओं का हथियारीकरण अब केवल एक भू-राजनीतिक सिद्धांत नहीं है, बल्कि एक वास्तविक संकट है जो विकासशील देशों की ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।"
वैश्विक तनावों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने साबित कर दिया है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए, ब्रिक्स देशों के भीतर लचीलापन बढ़ाना और चुनौतियों की समय पर पहचान करना बेहद आवश्यक है।
इस दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, ब्रिक्स देशों के बीच संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए 'ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली' (BRICS Integrated Early Warning System) पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और लचीला बनाने के लिए 'ब्रिक्स लॉजिस्टिक आपूर्ति श्रृंखला सहयोग ढांचा' भी तैयार किया गया है, जो संकट के समय में व्यापार को सुचारू बनाए रखेगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पीएम मोदी ने ब्रिक्स 2026 में किस मुख्य खतरे की ओर इशारा किया?
उत्तर: पीएम मोदी ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के हथियारीकरण के खतरे की ओर इशारा किया, जो वैश्विक विकास को बाधित कर सकता है।
प्रश्न 2: भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभ कौन से हैं?
उत्तर: भारत की अध्यक्षता के चार मुख्य स्तंभ लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability) हैं।