तेलंगाना के डीजीपी सी.वी. आनंद ने पुलिस बल के पुनर्गठन की घोषणा की है, जिसमें साइबर अपराध, ड्रग्स और सड़क सुरक्षा जैसी आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए 513 कर्मियों को नई भूमिकाओं में तैनात किया गया है।

  • 513 पुलिस कर्मियों को विशेष इकाइयों में पुनर्गठित किया गया है।
  • ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सुरक्षा को सर्वाधिक 224 कर्मियों की तैनाती मिली है।
  • साइबर अपराध और ड्रग्स के बढ़ते मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • कर्मियों के चयन के लिए गहन साक्षात्कार और 11 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

हैदराबाद: तेलंगाना पुलिस विभाग ने बदलते अपराध पैटर्न और सार्वजनिक सुरक्षा की आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने मानव संसाधन के प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव किया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) सी.वी. आनंद ने बुधवार को घोषणा की कि विभाग ने 513 विशेष कर्मियों को विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे ट्रैफिक प्रबंधन, ड्रग नियंत्रण, सतर्कता और साइबर अपराध में पुनर्वितरित किया है।

इस रणनीतिक बदलाव के तहत, सबसे बड़ा हिस्सा 224 कर्मियों का ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क सुरक्षा को दिया गया है। इसके बाद खाद्य मिलावट और ड्रग नियंत्रण के लिए 80 कर्मी, सतर्कता और प्रवर्तन के लिए 79 कर्मी, और नागरिक आपूर्ति के लिए 28 कर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, एंटी-करप्शन ब्यूरो, क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट और साइबर सुरक्षा ब्यूरो को 25-25 कर्मियों की नई तैनाती मिली है।

बदलते अपराधों का नया स्वरूप

डीजीपी आनंद ने रेखांकित किया कि पुलिसिंग का स्वरूप अब बदल चुका है। जहाँ पहले मुख्य ध्यान उग्रवाद और आतंकवाद पर था, वहीं अब पुलिस को ड्रग तस्करी, साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टेबाजी, निवेश धोखाधड़ी और खाद्य मिलावट जैसे जटिल मुद्दों से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की लत एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि पिछले वर्ष 835 छात्रों में नशीले पदार्थों के अंश पाए गए थे।

पुलिसिंग अब केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल और सामाजिक खतरों के खिलाफ एक तकनीकी युद्ध बन चुका है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम तेलंगाना में साइबर अपराध के कारण होने वाले भारी आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक है। पिछले वर्ष राज्य को साइबर अपराध के कारण लगभग ₹1,750 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। इसी तरह, सड़क सुरक्षा भी एक प्रमुख प्राथमिकता है, क्योंकि पिछले साल तेलंगाना में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 8,000 लोगों की जान गई थी।

प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया

इन 513 कर्मियों में 5 इंस्पेक्टर, 22 सब-इंस्पेक्टर, 14 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, 84 हेड कांस्टेबल और 388 कांस्टेबल शामिल हैं। चयन प्रक्रिया अत्यंत कठोर थी; कर्मियों के शैक्षिक पृष्ठभूमि का मूल्यांकन किया गया, साक्षात्कार लिए गए और अंत में तेलंगाना पुलिस अकादमी में 11 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, तेलंगाना पुलिस की विशेष इकाइयाँ जैसे Greyhounds और OCTOPUS मुख्य रूप से नक्सलवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जानी जाती थीं। हालांकि, वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए, इन इकाइयों की कार्यप्रणाली में भी आवश्यकतानुसार बदलाव किए जा रहे हैं ताकि वे आधुनिक खतरों के लिए तैयार रहें।

Frequently Asked Questions

1. पुलिस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध, ड्रग्स और सड़क दुर्घटनाओं जैसी उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।

2. ट्रैफिक विभाग को सबसे अधिक कर्मी क्यों दिए गए?
तेलंगाना में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली उच्च मृत्यु दर (लगभग 8,000 मौतें) को देखते हुए सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।