केरल उपभोक्ता आयोग ने BSNL को भ्रामक विज्ञापन और सेवा में कमी के लिए ₹15,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी ने रिचार्ज लीफलेट में सेकंड के बजाय मिनट के आधार पर कॉल शुल्क काटकर उपभोक्ता को गुमराह किया था।
मुख्य बातें
- BSNL को भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए दोषी पाया गया।
- कंपनी ने 84,000 सेकंड का वादा किया था, लेकिन कॉल शुल्क मिनट के आधार पर काटा।
- आयोग ने ₹15,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
- प्रिंटिंग मिस्टेक का बहाना उपभोक्ता पर बोझ नहीं डाला जा सकता।
केरल के एक उपभोक्ता आयोग ने BSNL को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह मामला एक ₹449 के प्रीपेड रिचार्ज से जुड़ा है, जिसमें कंपनी द्वारा दिए गए भ्रामक वादों के कारण एक उपभोक्ता को मानसिक और वित्तीय परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामला तब शुरू हुआ जब C V Jose नामक एक किसान ने 2016 में BSNL का ₹449 वाला रिचार्ज खरीदा। रिचार्ज के लीफलेट में स्पष्ट रूप से 84,000 सेकंड की मुफ्त कॉलिंग का वादा किया गया था। हालांकि, उपभोक्ता ने पाया कि कॉल का शुल्क 'सेकंड' के बजाय 'एक मिनट के पल्स' के आधार पर काटा जा रहा था। यानी, यदि कोई कॉल केवल कुछ सेकंड की भी होती, तो भी पूरे एक मिनट का बैलेंस काट लिया जाता था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला दूरसंचार क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए एक मिसाल है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अपने विज्ञापनों या लीफलेट में गलत जानकारी देती है, तो उस गलती का खामियाजा ग्राहक को नहीं भुगतना चाहिए। BSNL ने तर्क दिया कि यह केवल एक 'प्रिंटिंग मिस्टेक' थी, लेकिन आयोग ने इसे खारिज कर दिया।
सेवा प्रदाता द्वारा दी गई लिखित जानकारी पर भरोसा करना उपभोक्ता का कानूनी अधिकार है, और कंपनी अपनी गलतियों के लिए ग्राहकों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकती।
ट्रिसूर जिला आयोग के अध्यक्ष C T Sabu और सदस्यों ने पाया कि भ्रामक जानकारी ने उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित किया। यदि ग्राहक को पता होता कि कॉल सेकंड के बजाय मिनट के आधार पर काटी जाएगी, तो शायद वह यह प्लान नहीं चुनता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. आयोग ने BSNL को क्या दंड दिया?
आयोग ने BSNL को मानसिक पीड़ा और असुविधा के लिए ₹15,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
2. क्या BSNL ने अपनी गलती मानी?
BSNL ने इसे एक 'प्रिंटिंग मिस्टेक' बताया और कहा कि उन्होंने बाद में योजना में सुधार किया था, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया।