सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CESAM) की रिपोर्टिंग में विफलता पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर ऐसी सामग्री के विज्ञापनों से जुड़ा है।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नोटिस जारी किया।
  • सोशल मीडिया कंपनियों पर POCSO अधिनियम के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग न करने का आरोप।
  • इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों का मामला।
  • कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सोशल मीडिया कंपनियों को सीधे आरोपी बनाने की अनुमति दी।

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने एक याचिका पर संज्ञान लिया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया मध्यस्थ (Intermediaries) बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CESAM) की अनिवार्य रिपोर्टिंग करने में विफल रहे हैं।

न्यायमूर्ति जमशेद बुरजोर पारदीवाला और न्यायमूर्ति कृष्णन विनोद चंद्रन की पीठ ने 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' (JRCA) द्वारा दायर आवेदन पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नोटिस जारी किया है। यह याचिका एक बीबीसी रिपोर्ट और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम पर ऐसी सामग्री को बढ़ावा देने वाले सशुल्क विज्ञापन चलाए जा रहे थे।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला डिजिटल सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के बीच के संघर्ष को रेखांकित करता है। यदि सोशल मीडिया कंपनियां POCSO अधिनियम के तहत अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती हैं, तो वे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour) का लाभ नहीं उठा सकती हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल अमेरिकी संस्थाओं को रिपोर्ट करने से संतुष्ट नहीं किया जा सकता; उन्हें भारतीय पुलिस को भी सूचित करना अनिवार्य है।

याचिका में स्पष्ट किया गया कि सितंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को POCSO अधिनियम की धारा 19 और 20 के तहत पुलिस को अपराधों की रिपोर्ट करना अनिवार्य है। केवल अमेरिकी संस्थाओं को रिपोर्ट करना भारतीय कानून के तहत पर्याप्त नहीं है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

POCSO अधिनियम, 2012 को बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया था। इसके तहत, किसी भी प्रकार की बाल अश्लीलता या शोषण सामग्री की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

क्या आप जानते हैं?: आईटी अधिनियम की धारा 79 सोशल मीडिया कंपनियों को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए सुरक्षा देती है, लेकिन यह सुरक्षा केवल तभी मिलती है जब वे उचित सावधानी बरतें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. CESAM का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है Child Sexual Exploitation and Abuse Material (बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री)।

2. सोशल मीडिया कंपनियों को किसे रिपोर्ट करना चाहिए?
उन्हें POCSO अधिनियम के तहत स्थानीय पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई को रिपोर्ट करना अनिवार्य है।