अभिनेता विक्रांत मैसी ने अपनी शादीशुदा जिंदगी को मजबूत बनाए रखने का एक बेहद सरल लेकिन प्रभावी तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि झगड़ों को उसी रात खत्म कर देना चाहिए ताकि वे अगले दिन तक न बढ़ें।

  • शादी में झगड़े होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें सुलझाना जरूरी है।
  • विक्रांत मैसी के अनुसार, झगड़े को अगले दिन तक खींचना नहीं चाहिए।
  • मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, भावनात्मक जुड़ाव और बिना रक्षात्मक हुए सुनना मजबूत रिश्तों की नींव है।

बॉलीवुड अभिनेता विक्रांत मैसी और उनकी पत्नी शीतल ठाकुर पिछले चार वर्षों से एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रहे हैं। हाल ही में अपनी फिल्म 'मुसाफिर कैफे' के प्रचार के दौरान, मैसी ने अपनी शादी की मजबूती का राज साझा किया। उन्होंने बताया कि एक सफल रिश्ते के लिए हर दिन परफेक्ट होना जरूरी नहीं है, बल्कि मुश्किल दिनों को कैसे संभाला जाए, यह महत्वपूर्ण है।

मैसी का '365 दिन' वाला फॉर्मूला

विक्रांत मैसी ने एक बहुत ही व्यावहारिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा, "साल के 365 दिनों में से 350 दिन अच्छे होने चाहिए। 15 दिन हमें मैनेज करने होते हैं। हम इतना तो कर ही सकते हैं कि जब हम रात को किसी झगड़े या बहस के बाद सोने जाएं, तो उसे अगले दिन तक न ले जाएं। हम झगड़े को उसी दिन तक सीमित रखते हैं, भले ही अगली सुबह उसे सुलझाने की इच्छा हो।"

झगड़े को अगले दिन तक न खींचना भावनात्मक परिपक्वता का संकेत है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मैसी का यह दृष्टिकोण न केवल व्यावहारिक है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। यह तनाव को कम करने और साथी के प्रति सम्मान बनाए रखने में मदद करता है।

मनोवैज्ञानिकों का क्या कहना है?

इस विषय पर विशेषज्ञों की राय भी मैसी के विचारों का समर्थन करती है। Mpower (Aditya Birla Education Trust) की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट अलीशिबा अरसुद कहती हैं कि मजबूत शादियां संघर्ष की अनुपस्थिति पर नहीं, बल्कि नियमित और जानबूझकर किए गए भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी होती हैं। शोध बताते हैं कि जो जोड़े नियमित रूप से एक-दूसरे की सराहना करते हैं, उनके रिश्तों में संतुष्टि अधिक होती है।

वहीं, मनोवैज्ञानिक ऋतुजा वरदे का मानना है कि झगड़े के बाद 'सो जाना' हमेशा टालने की कोशिश नहीं होती। कभी-कभी यह एक 'कोपिंग मैकेनिज्म' के रूप में काम करता है। जब हम गुस्से में होते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का एमिग्डाला (Amygdala) हिस्सा अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे हम ऐसी बातें कह सकते हैं जिनका हमें पछतावा हो। शांत होकर सोने से मस्तिष्क के तर्कसंगत हिस्से को नियंत्रण वापस पाने में मदद मिलती है।

मजबूत रिश्ते के लिए सुझाव

विशेषज्ञों ने रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बताए हैं:

  • गैर-रक्षात्मक सुनना (Non-defensive Listening): बिना सफाई दिए या पलटवार किए साथी की बात सुनना।
  • विशिष्ट फीडबैक: आलोचना के बजाय विशिष्ट और सीमित फीडबैक देना ताकि साथी रक्षात्मक न हो।
  • भावनात्मक तालमेल: एक-दूसरे की जरूरतों को समझना और संघर्षों को जल्दी सुलझाना।
Did You Know?: मनोवैज्ञानिक शोध के अनुसार, जो जोड़े नियमित रूप से एक-दूसरे को 'थैंक यू' कहते हैं या सराहना करते हैं, उनके तलाक की दर काफी कम होती है।

Frequently Asked Questions

1. क्या झगड़े के बाद तुरंत बात करना जरूरी है?
नहीं, कभी-कभी शांत होने के लिए थोड़ा समय लेना या सो जाना बेहतर होता है ताकि गुस्से में गलत शब्द न निकलें।

2. एक खुशहाल शादी का सबसे बड़ा आधार क्या है?
भावनात्मक सुरक्षा, आपसी सम्मान और संघर्षों को सुलझाने की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण हैं।