महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ठाणे के 11 नमकीन कारखानों पर छापेमारी कर ₹20.48 लाख का असुरक्षित खाद्य स्टॉक जब्त किया है। जांच में सीवेज, कीड़े-मकोड़ों और बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में उत्पादन का खुलासा हुआ है।

  • ठाणे के 11 नमकीन और फरासन निर्माताओं के लाइसेंस निलंबित।
  • लगभग 29 टन असुरक्षित खाद्य सामग्री और कच्चा माल जब्त।
  • सीवेज, चूहों और कॉकरोच के बीच तैयार हो रहे थे चिप्स और नमकीन।
  • बिना वैध लाइसेंस के संचालित हो रही थीं कई इकाइयां।

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ठाणे के खार्दी गांव स्थित भस्कर कंपाउंड में एक व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान 11 अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर छापा मारा गया, जो फरासन, वेफर्स, चिवड़ा और नमकीन का उत्पादन कर रहे थे। अधिकारियों ने मौके से ₹20.48 लाख मूल्य का लगभग 29 टन खाद्य स्टॉक और कच्चा माल जब्त किया है।

जांच के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे चौंकाने वाली थीं। एफडीए अधिकारियों ने पाया कि उत्पादन क्षेत्र के फर्श तेल और गंदगी से चिपचिपे थे। कई इकाइयों की छतें और दीवारें अस्थायी चादरों से बनी थीं, जिससे बाहरी वातावरण और धूल-मिट्टी सीधे खाद्य पदार्थों में मिल रही थी। सबसे गंभीर बात यह थी कि कारखानों के बाहर सीवेज जमा था, जिससे पूरे परिसर में असहनीय दुर्गंध फैली हुई थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे छोटे खाद्य उद्योग अक्सर लागत कम करने के लिए स्वच्छता मानकों की अनदेखी करते हैं। यह न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSS Act) का खुला उल्लंघन है। जब भोजन सीवेज और कीटों के बीच बनता है, तो यह गंभीर फूड पॉइजनिंग और दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बन सकता है।

छापेमारी के दौरान पाया गया कि कर्मचारी बिना एप्रन, दस्ताने या कैप के गंदे कपड़ों में काम कर रहे थे। जब्त किए गए सामानों में आलू वेफर्स, फराली चिवड़ा, मसालेदार वेफर्स, सेव, भाकरवाड़ी और केले के चिप्स शामिल हैं। इसके अलावा, परिसर में इस्तेमाल किया गया पुराना खाद्य तेल भी मिला, जिसका पुन: उपयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

"खाद्य सुरक्षा केवल एक लाइसेंस नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है; जब बुनियादी स्वच्छता का अभाव होता है, तो भोजन पोषण के बजाय जहर बन जाता है।"

इस कार्रवाई की जद में आने वाले प्रमुख प्रतिष्ठानों में राजेश लालजी गुप्ता, राहुल फूड्स, कृष्णा बनाना चिप्स, कोमल वेफर्स, चस्का मस्का फूड्स और विमल नमकीन जैसे नाम शामिल हैं। एफडीए ने इन सभी के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं और 'स्टॉप-वर्क' ऑर्डर जारी किया है।

यह अभियान केवल ठाणे तक सीमित नहीं था। मुंबई के कंजुरमार्ग, जोगेश्वरी और मुलुंड में भी कई केंद्रों पर कार्रवाई की गई, जहां तापमान नियंत्रण की कमी और कचरे के ढेर के पास भोजन बनाने जैसी गंभीर खामियां पाई गईं।

क्या आप जानते हैं?: भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (FSS Act) के तहत किसी भी खाद्य व्यवसाय के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है।

Frequently Asked Questions

1. एफडीए ने इन इकाइयों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
एफडीए ने सभी 11 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं, काम रोकने का आदेश दिया है और ₹20.48 लाख का असुरक्षित स्टॉक जब्त किया है।

p>2. किन-किन उत्पादों को जब्त किया गया?
मुख्य रूप से आलू वेफर्स, चिवड़ा, नमकीन, सेव, भाकरवाड़ी और केले के चिप्स के साथ-साथ मैदा, बेसन और पाम ऑयल जब्त किया गया।