मनोज जरांगे पाटिल ने अपनी 13 दिवसीय भूख हड़ताल के बीच मुंबई मार्च का ऐलान किया है। उन्होंने सरकार के आश्वासनों को खारिज करते हुए कुनबी प्रमाणपत्रों की मांग को तेज कर दिया है।

  • मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई कूच की घोषणा की, तारीख 12 सितंबर को तय होगी।
  • प्रदर्शनकारी हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी प्रमाणपत्रों की मांग कर रहे हैं।
  • महायुति सरकार और जरांगे पाटिल के बीच संबंध तनावपूर्ण, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर साधा निशाना।

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग एक बार फिर उग्र रूप ले चुकी है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदर्शनकारी मुंबई की ओर प्रस्थान करेंगे। यह घोषणा गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 13वें दिन की गई, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।

विवाद का मुख्य केंद्र कुनबी जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन है। श्री जरांगे पाटिल की मांग है कि हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड में कुनबी प्रविष्टियों के आधार पर मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों को प्रमाणपत्र जारी किए जाएं और उन्हें रद्द करने के बजाय मान्य किया जाए। प्रदर्शनकारियों को संदेह है कि सरकार द्वारा लगाए गए शिविर प्रमाणपत्र देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें रद्द करने के लिए हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल प्रमाणपत्रों का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संघर्ष है। मराठा समुदाय महाराष्ट्र के चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाता है। मुंबई कूच के जरिए जरांगे पाटिल सरकार पर सीधा दबाव बनाना चाहते हैं ताकि प्रशासनिक देरी को खत्म कर तत्काल कानूनी समाधान निकाला जा सके।

दूसरी ओर, महायुति मंत्री उदय सामंत और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का कहना है कि सरकार 12 सितंबर से पहले इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के आधार पर ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने की प्रक्रिया जारी है।

स्थानीय भूख हड़ताल से मुंबई मार्च की ओर बढ़ना यह दर्शाता है कि जमीनी नेतृत्व और राज्य सरकार के बीच विश्वास पूरी तरह टूट चुका है।

राजनीतिक समीकरण तब और बिगड़ गए जब जरांगे पाटिल ने मराठा कोटा उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट की भी आलोचना करते हुए कहा कि अब सरकार समुदाय के बजाय पार्टी के हितों की बात कर रही है।

इस बीच, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने महायुति गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए जरांगे पाटिल का इस्तेमाल किया और अब उन्हें दबाना चाहती है।

क्या आप जानते हैं?: कुनबी जाति महाराष्ट्र की एक पारंपरिक कृषि समुदाय है, और इस दर्जा मिलने से मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कोटा के लाभ मिल सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मनोज जरांगे पाटिल मुंबई क्यों जा रहे हैं?
वे सरकार पर दबाव बनाने के लिए मुंबई जा रहे हैं ताकि मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र और आरक्षण का लाभ मिल सके।

2. हैदराबाद और सतारा गजट का क्या महत्व है?
इन ऐतिहासिक दस्तावेजों का उपयोग यह साबित करने के लिए किया जाता है कि मराठा परिवार ऐतिहासिक रूप से कुनबी थे, जिससे वे ओबीसी आरक्षण के पात्र हो जाते हैं।