मुंबई के वर्ली में सेंचुरी मिल के बंद होने के 20 साल बाद, बीएमसी अब श्रमिकों के परिवारों के लिए नए आधुनिक फ्लैटों के निर्माण की योजना को मंजूरी देने जा रही है। इस पुनर्विकास परियोजना से बीएमसी को ₹1,351 करोड़ की भारी भरकम राशि प्राप्त होगी।
- सेंचुरी मिल के 476 परिवारों को 300-400 वर्ग फुट के नए फ्लैट मिलेंगे।
- डेवलपर पेडर रियल्टी बीएमसी को ₹1,351 करोड़ का भुगतान करेगा।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दशकों पुराना कानूनी विवाद सुलझ गया है।
- यह परियोजना वर्ली के प्राइम लैंड पर आधुनिक आवासीय टावर बनाएगी।
मुंबई के रियल एस्टेट और शहरी विकास के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त होने जा रहा है। सेंचुरी मिल के बंद होने के लगभग दो दशक बाद, वर्ली में रह रहे पूर्व मिल श्रमिकों के परिवारों के लिए आखिरकार नए और आधुनिक घरों का सपना सच होने जा रहा है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास योजना को अंतिम मंजूरी देने के लिए तैयार है।
इस परियोजना के तहत, मौजूदा 21 पुरानी इमारतों को हटाकर वहां आधुनिक आवासीय टावर बनाए जाएंगे। योजना के अनुसार, लगभग 500 फ्लैट (300 से 400 वर्ग फुट के बीच) पुनर्वास के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि शेष फ्लैटों को डेवलपर बाजार दरों पर बेच सकेगा। बीएमसी ने इस परियोजना के लिए पेडर रियल्टी (Peddar Realty) को सफल बोलीदाता के रूप में चुना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और कानूनी संघर्ष
सेंचुरी मिल का यह मामला दशकों तक कानूनी पेचीदगियों में फंसा रहा। मूल रूप से, यह भूमि बीएमसी की थी और 1927 में सेंचुरी स्पिनिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को मात्र 1 रुपये वार्षिक किराए पर लीज पर दी गई थी। 1955 में लीज समाप्त होने के बावजूद, विवाद तब गहरा गया जब 2006 में मिल के संचालन बंद हो गए।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां जनवरी 2025 में एक ऐतिहासिक फैसला आया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लीज की शर्तों के तहत बीएमसी को यह जमीन कंपनी को सौंपने की आवश्यकता नहीं है। इस निर्णय ने पुनर्विकास के मार्ग से सबसे बड़ी बाधा को हटा दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना मुंबई के शहरी पुनर्विकास मॉडल के लिए एक मिसाल है। यह न केवल पुराने औद्योगिक अवशेषों को आधुनिक आवासीय संपत्तियों में बदलने की क्षमता रखती है, बल्कि यह बीएमसी के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत भी है। ₹1,351 करोड़ का भुगतान वर्तमान भूमि मूल्य (लगभग ₹660 करोड़) से काफी अधिक है, जो परियोजना की व्यावसायिक व्यवहार्यता को दर्शाता है।
कानूनी जीत और शहरी नियोजन का यह संगम मुंबई के श्रमिक वर्ग के लिए दशकों पुराने संघर्ष का अंत है।
हालांकि, इस परियोजना को राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता अशरफ अज़मी ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इस भूमि का विकास मूल्य ₹13,000 करोड़ तक हो सकता है, और बीएमसी को बहुत कम कीमत पर यह अवसर दे दिया गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पुनर्विकास के तहत श्रमिकों को क्या मिलेगा?
उत्तर: श्रमिकों के परिवारों को 300 से 400 वर्ग फुट के आधुनिक सुविधाओं वाले नए फ्लैट दिए जाएंगे।
प्रश्न 2: डेवलपर बीएमसी को कितनी राशि देगा?
उत्तर: पेडर रियल्टी इस परियोजना के लिए बीएमसी को ₹1,351 करोड़ का भुगतान करेगी।