मनिपुर के 14 नागरिक समूहों ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय जनगणना से पहले NRC लागू करने की मांग की। वे दावा करते हैं कि वर्तमान विस्थापन और संस्थागत विघटन के माहौल में जनगणना गलत डेटा देगी।

दिल्ली – 14 नागरिक संगठनों की एक गठबंधन ने आज राजधानी में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर, राष्ट्रीय जनगणना (Census) से पूर्व राष्ट्रीय पुनर्रजिस्ट्रीकरण (NRC) की माँग रखी। यह मांग मनिपुर में चल रहे जातीय तनाव, बड़े पैमाने पर विस्थापन और सरकारी संस्थाओं के टूटने के बीच उठी है, जहाँ कई नागरिक समूह यह कहते हैं कि बिना NRC के जनगणना करना राज्य की जनसंख्या आँकड़ों को विकृत कर देगा।

पृष्ठभूमि और सामाजिक दबाव

मनिपुर, उत्तर‑पूर्वी भारत का एक छोटा राज्य, पिछले दो वर्षों में एथनिक हिंसा, जमीनी अधिकारों के विवाद और बड़ी संख्या में प्रवासियों के कारण अस्थिरता का सामना कर रहा है। मानवीय संगठनों के अनुसार, लगभग 30,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि कई स्थानीय समुदायों ने अपने अधिकारों को खतरे में देखते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान की मांग की है।

जनगणना की चुनौतियाँ

भारत का अगला राष्ट्रीय जनगणना 2024 में शुरू होने वाला है, जो सामाजिक नीतियों, संसाधन आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों की पुनर्संरचना में प्रमुख भूमिका निभाता है। यदि इस प्रक्रिया के दौरान प्रवासियों की सही पहचान नहीं हो पाई, तो राज्य के विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और संसाधन वितरण में गंभीर असमानताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। मनिपुर के प्रतिनिधियों ने कहा कि NRC के बिना जनगणना करने से "डेमोग्राफिक विसंगतियों" को स्थायी रूप दिया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव

केन्द्रीय सरकार ने अभी तक इस माँग पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, परंतु कई राजनेता इस मुद्दे को संवेदनशील मानते हुए कहा है कि NRC का कार्यान्वयन एक जटिल प्रक्रिया है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर सावधानी से लागू किया जाना चाहिए। यदि दिल्ली में इस प्रस्ताव को समर्थन मिलता है, तो यह अन्य उत्तर‑पूर्वी राज्यों में भी समान माँगों को प्रेरित कर सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता पर नया प्रश्न उठेगा।

आगे का मार्गदर्शन

विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिक समूहों को अपने दावों को ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि नीति निर्माताओं को व्यावहारिक समाधान तैयार करने में मदद मिले। साथ ही, सरकार को विस्थापित लोगों के पुनर्वास, मानवीय सहायता और सामाजिक पुनर्संलयन के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए, ताकि NRC या जनगणना जैसी बड़े पैमाने की प्रक्रियाएँ सामाजिक शांति के साथ आगे बढ़ सकें।