भारत में डिजिटल भुगतान की क्रांति के बावजूद, गुजरात आने वाले विदेशी पर्यटकों और एनआरआई को एटीएम, मुद्रा विनिमय और छोटे विक्रेताओं के साथ भुगतान करने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- विदेशी पर्यटकों को एटीएम से पैसे निकालने और मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) में कठिनाइयां हो रही हैं।
- छोटे विक्रेताओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड स्वीकार न करने के कारण कैश पर निर्भरता बढ़ी है।
- भारतीय मोबाइल नंबर और आधार की अनिवार्यता के कारण UPI सेटअप करना विदेशियों के लिए जटिल है।
गुजरात के अहमदाबाद और गांधीनगर में आने वाले विदेशी पर्यटकों और अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए डिजिटल इंडिया का अनुभव उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। जहाँ एक ओर भारत में Unified Payments Interface (UPI) ने भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों के लिए यह व्यवस्था एक बाधा बन गई है। थाईलैंड बास्केटबॉल टीम के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख थिबोल्ट स्पिटाखिस ने बताया कि अहमदाबाद में पर्यटन स्थलों पर प्रवेश टिकट जैसे छोटे भुगतानों के लिए उन्हें नकदी (Cash) पर निर्भर रहना पड़ा, क्योंकि वे यूपीआई का उपयोग करने के लिए तैयार नहीं थे।
समस्याएं केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं हैं। कई पर्यटकों ने एटीएम (ATM) से पैसे निकालने में विफलता और मुद्रा विनिमय केंद्रों की कमी की शिकायत की है। स्पिटाखिस के अनुसार, बैंक समन्वय की समस्याओं के कारण क्रेडिट कार्ड एटीएम में काम नहीं कर रहे थे और शॉपिंग मॉल के एक्सचेंज काउंटर या तो बंद थे या वहां विनिमय दरें बहुत खराब थीं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली 'घरेलू' स्तर पर तो विश्वस्तरीय है, लेकिन 'अंतरराष्ट्रीय एकीकरण' (International Integration) के मामले में अभी भी काफी पीछे है। जब एक देश पर्यटन को बढ़ावा देता है, तो भुगतान की सुगमता बुनियादी ढांचे का हिस्सा होनी चाहिए। यदि विदेशी पर्यटक भुगतान में असुरक्षित या असहज महसूस करते हैं, तो यह देश की पर्यटन छवि और विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।
स्विट्जरलैंड की अन्या बजाज ने साझा किया कि उनके देश में TWINT जैसे मोबाइल भुगतान और कॉन्टैक्टलेस कार्ड हर जगह चलते हैं, लेकिन भारत में छोटे विक्रेताओं के पास अक्सर खुले पैसे (Change) नहीं होते, जिससे साधारण खरीदारी भी असुविधाजनक हो जाती है। इसी तरह, अमेरिका की मेगन फारले ने बताया कि भारतीय मोबाइल नंबर न होने के कारण उन्हें लेनदेन की रसीदें तक नहीं मिल सकीं।
डिजिटल भुगतान का लोकतंत्रीकरण तब तक अधूरा है जब तक कि यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और तकनीकी बाधाओं को पार न कर ले।
एनपीसीआई (NPCI) ने 'UPI One World' वॉलेट लॉन्च किया है, जिससे विदेशी नागरिक अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड से वॉलेट लोड कर भुगतान कर सकते हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश पर्यटकों को इस सुविधा की जानकारी नहीं है या इसे सेटअप करना उनके लिए कठिन है। दीपिका गुप्ता जैसे एनआरआई का कहना है कि आधार और भारतीय सिम की अनिवार्यता इस प्रक्रिया को जटिल बनाती है।
| भुगतान विधि | भारतीय नागरिकों के लिए | विदेशी पर्यटकों के लिए |
|---|---|---|
| UPI / GPay | अत्यंत सरल (आधार/बैंक लिंक) | कठिन (भारतीय सिम की आवश्यकता) |
| क्रेडिट कार्ड | बड़े स्टोर में उपलब्ध | छोटे विक्रेताओं द्वारा अस्वीकृत |
| नकद (Cash) | कम उपयोग | प्राथमिक विकल्प (परंतु खुले पैसों की कमी) |
भविष्य में 'UPI Global Reverse Acceptance' सिस्टम से उम्मीद है कि यह समस्या हल होगी, जिससे पर्यटक अपने देश के मौजूदा ऐप्स का उपयोग करके भारतीय व्यापारियों को भुगतान कर सकेंगे।
Frequently Asked Questions
1. विदेशी पर्यटक भारत में भुगतान के लिए किन मुख्य समस्याओं का सामना करते हैं?
मुख्य समस्याओं में अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड का छोटे विक्रेताओं द्वारा स्वीकार न किया जाना, एटीएम में विड्रॉल फेल होना और यूपीआई के लिए भारतीय मोबाइल नंबर की अनिवार्यता शामिल है।
2. UPI One World क्या है?
यह NPCI द्वारा संचालित एक वॉलेट है जो विदेशियों और NRIs को विदेशी कार्डों के माध्यम से पैसे लोड करने और भारत में डिजिटल भुगतान करने की सुविधा देता है।