जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा बलों ने थानामंडी क्षेत्र में दो आतंकियों को सीसीटीवी की फुटेज से पहचाना, जिससे व्यापक खोज‑पड़ताल शुरू हुई। साथ ही साम्बा जिले में एक ड्रोन बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए जब्ती की गई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सीसीटीवी फुटेज ने दो संभावित आतंकियों की पहचान की
- राजौरी के थानामंडी में सशस्त्र सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त खोज अभियान चलाया
- साम्बा में बरामद ड्रोन की तकनीकी जांच जारी है
जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले के थानामंडी क्षेत्र में रविवार रात को दो संभावित आतंकियों को सीसीटीवी कैमरों ने उजागर किया। इस फुटेज को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे भारतीय सेना, जम्मू‑कश्मीर पुलिस के विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) ने तुरंत एक संयुक्त कोर्डन‑ऐंड‑सर्च अभियान आरंभ किया।
ऑपरेशन शेरुवाली का विस्तार
यह खोज कार्रवाई पहले से चल रहे "ऑपरेशन शेरुवाली" का हिस्सा है, जो 23 मई से राजौरी के मंझाकोटे सेक्टर में स्थित डोरिमल‑गंबीर‑मुघलान पहाड़ी जंगल में दो‑तीन अल्पसंख्यक उग्रवादी समूहों को खोजने के लिए चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि टीमों ने भांगहाई टॉप और उसके आस‑पास के गांवों में घेरा बांधा, ताकि संदिग्धों को ट्रैक किया जा सके।
साम्बा में ड्रोन की बरामदी
इसी दिन, साम्बा जिले के चाक सालरिया में एक स्थानीय निवासी ने सुबह की सैर के दौरान एक कृषि खेत में अनाम ड्रोन पाया। वह तुरंत पास के सेना इकाई को सूचित कर गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने उस ड्रोन को जब्त कर फोरेंसिक परीक्षण के लिए ले लिया। विशेषज्ञों को ड्रोन की पेलोड क्षमता, संचार प्रोटोकॉल और संभावित सीमा‑पार स्रोतों की जाँच करने का कार्य सौंपा गया है।
संभावित प्रभाव और आगे की कार्रवाई
सीसीटीवी द्वारा दो आतंकियों की पहचान और ड्रोन की बरामदी दोनों ही घटनाएँ क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता को दर्शाती हैं। यदि ड्रोन किसी विदेशी समूह से जुड़ा पाया जाता है, तो यह भारत‑पाकिस्तान या अन्य सीमापार तनाव की नई जटिलता जोड़ सकता है। साथ ही, थानामंडी में चल रहे खोज‑अभियान का लक्ष्य संभावित गिरोहों को नष्ट करना और स्थानीय जनसंख्या में सुरक्षा का भरोसा कायम करना है।
अधिक जानकारी और अपडेट के लिए स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।