महाराष्ट्र के कल्याण स्थित आधारवाड़ी सेंट्रल जेल की रसोई में गैस रिसाव के कारण अचानक आग लग गई, जिसमें दो कैदी गंभीर रूप से झुलस गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- महाराष्ट्र के कल्याण स्थित आधारवाड़ी सेंट्रल जेल की रसोई में भीषण आग लगी।
- हादसे में दो कैदी, तारक गाजी और आसिफ सिंधु, गंभीर रूप से झुलस गए।
- शुरुआती जांच में रसोई में गैस रिसाव को आग लगने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण में स्थित आधारवाड़ी सेंट्रल जेल से एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई है। जेल की रसोई में खाना बनाते समय अचानक भीषण आग लग गई, जिससे जेल परिसर के भीतर अफरा-तफरी मच गई। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे के पीछे रसोई गैस (एलपीजी) पाइपलाइन में हुआ रिसाव मुख्य कारण माना जा रहा है।
इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में रसोई में काम कर रहे दो कैदी गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों की पहचान 30 वर्षीय तारक गाजी और 38 वर्षीय आसिफ सिंधु के रूप में हुई है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, तारक गाजी लगभग 10 से 12 प्रतिशत झुलस गए हैं और उन्हें इलाज के लिए उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, आसिफ सिंधु की हालत अधिक गंभीर बताई जा रही है, जो लगभग 30 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। उन्हें बेहतर इलाज के लिए कलवा अस्पताल रेफर किया गया है।
त्वरित कार्रवाई और बचाव अभियान
आग लगने की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आग पर काबू पाया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जेल अधिकारियों ने पुष्टि की है कि आग को बैरक और अन्य संवेदनशील हिस्सों में फैलने से रोक लिया गया था। इस घटना में किसी अन्य कैदी या कर्मचारी को चोट नहीं आई है और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है।
जेलों में सुरक्षा ऑडिट की तत्काल आवश्यकता
यह घटना भारतीय जेलों में सुरक्षा मानकों और बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जेलों जैसी संवेदनशील जगहों पर, जहां सुरक्षा कारणों से आवाजाही बेहद नियंत्रित होती है, आग जैसी आपदाएं बेहद घातक साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों की रसोई, बिजली के तारों और गैस पाइपलाइनों की नियमित जांच (सेफ्टी ऑडिट) अनिवार्य होनी चाहिए। फिलहाल, पुलिस और जेल प्रशासन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है ताकि लापरवाही के कारणों का पता लगाया जा सके।