जम्मू‑कश्मीर की सीमा जिलों पूंछ और राजौरी में सुरक्षा बलों ने आतंकवादी छिपने की जगह से 215 पिका गन गोलियां बरामद कीं। राजौरी में दो संदिग्धों की खोज के लिए चल रही छँटाई ऑपरेशन दूसरे दिन तक विस्तारित है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पूंछ में छिपे ठिकाने से 215 पिका गन गोलियां बरामद की गईं।
  • राजौरी में दो आतंकियों की खोज के लिए दो दिन की संयुक्त छँटाई जारी है।
  • ऑपरेशन शेरुवालि अब 54वें दिन पर पहुंच चुका है, जिससे उग्र समूहों पर दबाव बढ़ेगा।

जम्मू‑कश्मीर के पूंछ जिले के सवाईजियान गगरंगा गाँव में सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी छिपने वाले ठिकाने से 215 पिका गन गोलियां बरामद कीं। यह कार्रवाई जाँच‑पड़ताल के हिस्से के तौर पर विशेष ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की नियमित गश्त के दौरान हुई। इस बरामदगी से यह स्पष्ट होता है कि सीमा क्षेत्रों में अभी भी प्रतिबंधित हथियारों की आपूर्ति चल रही है, जिसका मुकाबला करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को निरंतर सतर्क रहने की आवश्यकता है।

राजौरी में छँटाई ऑपरेशन का विस्तार

पिछले बुधवार को राजौरी जिले के थानामंडी में दो संदेहास्पद आतंकियों को पकड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया कॉर्डन‑और‑सर्च ऑपरेशन अब दूसरे दिन तक जारी है। सेना, J&K पुलिस के SOG और सीआरपीएफ के मिलेजुले बलों ने भांगहाई टॉप, कर्योते और कोपरा टॉप सहित घने जंगल वाले गांवों में व्यापक छँटाई की। CCTV फुटेज में दिखा कि ये दो संदिग्ध रविवार रात को एक सड़क पार कर रहे थे, जिससे सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तेज़ी से कार्रवाई शुरू हुई।

ऑपरेशन शेरुवालि: दीर्घकालिक प्रतिबंधक रणनीति

मई 23 से चल रहा ऑपरेशन शेरुवालि, जो राजौरी के मनजाकोटे सेक्टर में डोरिमाल‑गंबीर‑मुग्लान बेल्ट में दो‑तीन उग्र समूहों को निशाना बना रहा है, अब अपना 54वां दिन पार कर चुका है। इस संयुक्त छँटाई अभियान का लक्ष्य न केवल हथियारों की बरामदगी है, बल्कि आतंकवादी नेटवर्क को विघटित करना और स्थानीय जनता को सुरक्षा की भावना प्रदान करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर जमीनी कार्रवाई और खुफिया सहयोग से यह क्षेत्र भविष्य में आतंकवादी गतिविधियों के लिए कम आकर्षक बन जाएगा।

भविष्य की चुनौतियाँ और संभावित प्रभाव

जारी छँटाई कार्य से यह स्पष्ट हो रहा है कि सीमा क्षेत्रों में अभी भी कई अज्ञात छिपने के स्थान मौजूद हैं। यदि इन ठिकानों से हथियारों की बरामदगी और संभावित आतंकियों की पहचान सफल रहती है, तो यह न केवल स्थानीय सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी रणनीति को सुदृढ़ करेगा। साथ ही, इस तरह की कार्रवाई से स्थानीय जनता का भरोसा भी पुनः स्थापित हो सकता है, जो सामाजिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।