नोएडा के सेक्टर 63 में एक हाई‑टेंशन पावर लाइन के टूटने से सड़क पर गिरते ही स्कूटर में आग लग गई, जिससे पाँच लोगों को चोटें आईं। स्थानीय लोग बिजली विभाग पर रख‑रखाव की लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- हाई‑टेंशन लाइन के टूटने से सड़क पर गिरा और स्कूटर में आग लगी।
- पाँच लोग घायल, उनमें से तीन गंभीर स्थिति में हैं।
- स्थानीय लोग बिजली विभाग की समय पर देख‑रेख न करने की आलोचना कर रहे हैं।
नोएडा के सेक्टर 63, छिज़र्सी इलाके में बुधवार शाम को एक चौंका देने वाली घटना घटी। एक हाई‑टेंशन पावर लाइन अचानक टूट कर नीचे गिर गई और उसी समय एक स्कूटर के पास गिरे। बिजली के संपर्क में आने के कारण स्कूटर में आग लग गई, जिससे पास में मौजूद पाँच व्यक्तियों को इलेक्ट्रिक शॉक और जलने के कारण चोटें आयीं। स्थानीय पुलिस और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की पुष्टि की।
घटना की विस्तृत जानकारी
घटना स्थल पर मौजूद साक्षी ने बताया कि पावर लाइन के टूटने का शोर सुनते ही कई लोग तुरंत मौके पर पहुँच गए। स्कूटर पर लगी आग तेज़ी से फैली, जिससे आसपास के लोगों को बचाने के लिए तत्काल फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। एम्बुलेंसें भी तुरंत पहुंची और घायल लोगों को निकटतम अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, पाँच में से दो लोग हल्की चोटों से बाहर हो रहे हैं, जबकि शेष तीन गंभीर स्थिति में हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के बाद, स्थानीय निवासी और व्यापारी बिजली विभाग पर कड़ी निंदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई महीनों से पावर लाइन की देख‑रख में कमी देखी जा रही है और इस तरह की लापरवाही से नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह तुरंत इस मुद्दे को सुलझाए।
पिछला इतिहास और नियामक पहल
हाई‑टेंशन लाइनों की देख‑रख भारत में कई बार चुनौती बन चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में, कई बड़े शहरों में इसी तरह की घटनाएँ रिपोर्ट की गई हैं, जिनमें अक्सर अपर्याप्त रख‑रखाव, पुरानी बुनियादी संरचना और अनियमित मौसम की स्थितियों को कारण बताया गया है। राष्ट्रीय विद्युत नियामक प्राधिकरण (एनआरसी) ने हाल ही में नई सुरक्षा मानकों की घोषणा की थी, लेकिन उनका कार्यान्वयन अभी भी चुनौतियों से भरा है।
आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय नगरपालिका और बिजली विभाग को मिलकर नियमित निरीक्षण, समय पर मरम्मत और सार्वजनिक जागरूकता अभियानों को तेज़ी से लागू करना चाहिए। साथ ही, आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों की तत्परता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।