अहमदाबाद की 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ के बीच 41 चिकित्सा आपातकालीन मामले सामने आए, जिनमें बेहोशी सबसे प्रमुख कारण रहा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • अहमदाबाद की 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान 41 आपातकालीन चिकित्सा मामले दर्ज किए गए।
  • बेहोशी (fainting) सबसे आम समस्या रही, जिसमें 15 मामले सामने आए।
  • EMRI 108 की टीमों ने त्वरित सहायता प्रदान की और मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में स्थानांतरित किया।
  • सुरक्षा के लिए 31,000 से अधिक पुलिसकर्मी और AI-आधारित निगरानी तैनात की गई थी।

अहमदाबाद: गुजरात के ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद में आयोजित 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां देखने को मिलीं। गुरुवार शाम तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, रथ यात्रा मार्ग पर कुल 41 चिकित्सा आपातकालीन मामले दर्ज किए गए। आपातकालीन चिकित्सा सेवा (EMRI 108) की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें सबसे अधिक मामले बेहोशी के थे, जो उमस और भीड़ के कारण उत्पन्न हुई स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करते हैं।

स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल का विवरण

चिकित्सा टीमों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दर्ज किए गए 41 मामलों में 15 लोग बेहोश हुए, जबकि 5 लोगों को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता पड़ी। इसके अतिरिक्त, गिरने (falls) और सांस लेने में कठिनाई के 4-4 मामले सामने आए। अन्य गंभीर मामलों में सड़क दुर्घटनाएं (3 मामले), पेट दर्द, दौरे (convulsions), सीने में दर्द, निर्जलीकरण (dehydration) और सिरदर्द शामिल थे। चिकित्सा कर्मियों ने तत्काल मौके पर ही प्राथमिक उपचार प्रदान किया और स्थिति गंभीर होने पर मरीजों को सरदाबेन अस्पताल और एलजी अस्पताल जैसे नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भेजा।

सुरक्षा और प्रबंधन के कड़े इंतजाम

अहमदाबाद की यह रथ यात्रा, पुरी के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी रथ यात्रा मानी जाती है। इस विशाल आयोजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व प्रबंध किए थे। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए 31,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए, भीड़ नियंत्रण और निगरानी के लिए AI-सक्षम निगरानी प्रणाली, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का व्यापक जाल बिछाया गया था।

प्रशासनिक समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया

EMRI 108 ने यात्रा मार्ग के रणनीतिक स्थानों पर एम्बुलेंस और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को तैनात किया था। ये टीमें स्थानीय पुलिस, नागरिक अधिकारियों और अस्पतालों के साथ निरंतर समन्वय में काम कर रही थीं ताकि किसी भी अप्रिय घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके। रथ यात्रा का समापन पारंपरिक मार्ग के माध्यम से हुआ, जहाँ श्रद्धालुओं के उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता भी चरम पर थी।