सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में जहाँ याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होते हैं, लाइव स्ट्रीमिंग को प्रतिबंधित करने का प्रोटोकॉल लागू किया। इस कदम के साथ वर्चुअल विकल्प भी दिया गया, जिससे न्यायालयिक प्रक्रिया में शिष्टाचार और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले याचिकाकर्ताओं की सुनवाई लाइव नहीं की जाएगी।
- सुप्रीम कोर्ट वर्चुअल रूप से सुनवाई का विकल्प प्रदान करेगा।
- निर्णय का उद्देश्य कोर्ट की शिष्टाचार, सुरक्षा और सार्वजनिक भरोसे में सुधार है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को एक व्यापक प्रोटोकॉल अपनाया, जिसमें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित याचिकाकर्ताओं की सुनवाई को लाइव स्ट्रीम या रिकॉर्ड नहीं किया जाएगा। यह कदम हाल ही में एक याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय में अनुशासनहीन व्यवहार करने की घटना के बाद लिया गया।
घटना की पृष्ठभूमि
10 जुलाई को, जजों के एक बेंच के सामने उपस्थित याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप ने न्यायाधीशों पर चिल्लाते हुए कागज़ फेंके और मुख्य न्यायाधीश के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। सुरक्षा कर्मियों द्वारा उन्हें कक्ष से बाहर निकाल दिया गया, जबकि न्यायालय ने उस पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की। इस घटना के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा हुए, जिससे सार्वजनिक चर्चा तेज़ हो गई।
नया प्रोटोकॉल
सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि जो पक्षकार व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होना चाहते हैं, उन्हें वर्चुअल मोड में भाग लेने का विकल्प भी दिया जाएगा। यदि कोई पक्षकार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना दृढ़ता से चाहता है, तो उसे निर्धारित शर्तों के तहत ही अनुमति दी जाएगी, जिसमें अनुशासन और सुरक्षा के मानदंड शामिल हैं। इस प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को बरकरार रखते हुए कोर्ट की सुरक्षा और शिष्टाचार को सुनिश्चित करना है।
समाधान समारोह और केस बैक्लॉग
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए गए निर्देशों में कहा कि न्यायाधीश वर्तमान में आयोजित हो रहे समाधान समारोह में भाग लेंगे, जिसका समापन 21‑23 अगस्त के विशेष लोक अदालत में होगा। बैक्लॉग को कम करने हेतु लगभग 100 बंच मामलों को तेज़ी से निपटाने का प्रस्ताव किया गया, जिससे अनुमानित 9,177 मामलों का निपटारा होगा। इस कदम से न्यायिक कार्यक्षमता में सुधार और नागरिकों के विश्वास में वृद्धि की उम्मीद है।
भविष्य की दिशा
न्यायालय ने केस सूची को सरल बनाने, समानता लाने और अनुशासनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने हेतु एक विशेष कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा है। इस कमेटी को मामलों की सूची को व्यवस्थित करने और अनावश्यक देरी को रोकने के लिए सिफ़ारिशें देने का कार्य सौंपा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल परिवर्तन और प्रोटोकॉल बदलाव भारतीय न्यायिक प्रणाली को आधुनिकता की ओर अग्रसर करेगा, जबकि सार्वजनिक विश्वास को भी मजबूत करेगा।