प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को जींद-सोनीपत मार्ग पर रवाना किया, जो भारतीय रेलवे के लिए हरित ऊर्जा के युग की शुरुआत है। यह नवाचार भारत को स्वच्छ परिवहन की वैश्विक दौड़ में अग्रणी बनाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया।
- यह ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विकसित की गई है।
- यह 89 किलोमीटर का पायलट प्रोजेक्ट है, जिसमें जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है।
- इस तकनीक के साथ भारत जर्मनी, जापान और चीन जैसे देशों के क्लब में शामिल हो गया है।
भारत के रेल इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कदम न केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का प्रतीक है, बल्कि भारत के 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर भी है।
तकनीकी विशेषज्ञता और स्वदेशी निर्माण
इस अत्याधुनिक ट्रेनसेट का विकास चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा किया गया है, जो भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। यह 10-कार ट्रेनसेट दो ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) से लैस है, जो कुल 2,400 kW की शक्ति प्रदान करती हैं। 89 किलोमीटर के इस पायलट रूट पर ट्रेन अपनी अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा तक प्राप्त कर सकती है।
हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना की सफलता के लिए जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने इस साइट पर संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस प्रदान कर दिया है। यह बुनियादी ढांचा भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में हाइड्रोजन रेल नेटवर्क के विस्तार का आधार बनेगा।
यात्रा विवरण और स्टॉपेज
यह सेवा प्रतिदिन संचालित होगी। ट्रेन संख्या 74010 जींद से सुबह 07:40 बजे प्रस्थान कर 09:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी, जबकि वापसी में ट्रेन संख्या 74009 सोनीपत से 10:40 बजे चलकर 13:00 बजे जींद पहुंचेगी। इस यात्रा के दौरान ट्रेन जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललिता खेड़ा, भाम्बेवा, इशापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, गोहाना, रभरा, लाठ, मोहाना हरियाणा और बरवासनी जैसे 12 प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।
वैश्विक परिदृश्य में भारत का स्थान
हाइड्रोजन तकनीक को अपनाकर, भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ गया है जो स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनमें जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका शामिल हैं। यह पहल न केवल कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।